गोंडा: मनकापुर में स्थित एपी इंका व आरपी इंका में प्रबंधक की जिद के
चलते 50 शिक्षक पांच माह से एक-एक रुपये को मोहताज हैं।
यहां मनमानी
नियुक्ति को लेकर वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गयी थी। बहरहाल बाद में
प्रबंधक से विवादित शिक्षकों को छोड़कर अन्य का वेतन बिल प्रस्तुत करने के
लिए कहा था लेकिन दोनों कॉलेज के प्रबंधक ने बिल नहीं दिया है। विभाग के
साथ ही प्रशासनिक अधिकारी भी मूक बने हैं।
माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित शासन से सहायता प्राप्त इंटर
कॉलजों में मनमानी नियुक्ति का खेल चलता है, जहां डीआइओएस से साठगांठ करके
शिक्षकों को वेतन भुगतान किया जाता है। इसी तरह का खेल तत्कालीन डीआइओएस
राम खेलावन ने खेला। प्रबंधकों के दावे पर ही शिक्षकों को वेतन भुगतान कर
दिया। माध्यमिक शिक्षक संघ के मंडलीय मंत्री विनय कुमार शुक्ल ने कमिश्नर
से लेकर शासन तक शिकायत की। जिसके बाद तत्कालीन डीआइओएस हृदय नारायण
त्रिपाठी ने मनमानी नियुक्ति वाले कॉलेजों के वेतन बिल पर हस्ताक्षर करने
से मना करते हुए नियुक्ति से संबंधित अभिलेख तलब किया। बहरहाल बाद में अपर
आयुक्त प्रशासन की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने 29 शिक्षकों की नियुक्ति को
मनमानी करार दिया। जांच के दौरान शिक्षकों को वेतन नहीं मिला। हालांकि
जिला विद्यालय निरीक्षक सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने प्रबंधकों को अविवादित
शिक्षकों का वेतन बिल प्रस्तुत करने के लिए कहा। इसके बाद ज्यादातर कॉलेजों
ने विवादित शिक्षकों का नाम हटाकर बिल प्रस्तुत कर शिक्षकों को वेतन दिला
दिया, लेकिन एपी इंटर कॉलेज व आरपी इंटर कॉलेज मनकापुर के प्रबंधक ने बिल
नहीं प्रस्तुत किया, जिससे वहां शिक्षक आर्थिक समस्या का सामना कर रहे हैं।
कॉलेज के प्रबंधक से इस बाबत संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात
नहीं हो सकी।
जिम्मेदार बोल
- जिला विद्यालय निरीक्षक सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि प्रबंधक
वेतन बिल प्रस्तुत करते हैं। जिसके आधार प्रबंधकीय स्कूलों में शिक्षकों का
भुगतान होता है। वेतन को लेकर संबंधित कॉलेज के शिक्षक कोई शिकायत करेंगे
तो रास्ता निकाला जाएगा।
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