त्तर प्रदेश के मेरठ जिले में शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक एवं चर्चा का आयोजन किया गया। इस दौरान प्राथमिक, जूनियर और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने एकजुट होकर शिक्षा विभाग और सरकार के सामने अपनी प्रमुख समस्याएं रखीं। Amar Ujala द्वारा जारी वीडियो में शिक्षकों की नाराजगी और अपेक्षाएं साफ दिखाई देती हैं।
🔴 शिक्षकों की प्रमुख समस्याएं क्या हैं?
मेरठ में हुई इस चर्चा के दौरान शिक्षकों ने निम्नलिखित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया:
1️⃣ वेतन और एरियर भुगतान में देरी
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कई शिक्षकों का वेतन समय पर नहीं मिल रहा
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प्रमोशन और चयन वेतनमान का एरियर वर्षों से लंबित
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NPS कटौती के बाद इन-हैंड सैलरी कम होती जा रही है
👉 शिक्षकों का कहना है कि आर्थिक अस्थिरता से उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है।
2️⃣ पदोन्नति (Promotion) की प्रक्रिया ठप
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जूनियर से सीनियर स्तर पर प्रमोशन लंबे समय से रुका
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विभागीय नियमों और कोर्ट मामलों के नाम पर देरी
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योग्य शिक्षक वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत
मांग: समयबद्ध और पारदर्शी पदोन्नति प्रक्रिया लागू की जाए।
3️⃣ स्थानांतरण नीति को लेकर असंतोष
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पारस्परिक और सामान्य ट्रांसफर लंबे समय से बंद
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महिला शिक्षकों को विशेष परेशानी
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दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षों से तैनाती
शिक्षकों ने न्यायसंगत ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने की मांग की।
4️⃣ शिक्षक भर्ती में देरी और खाली पद
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प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में हजारों पद खाली
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TGT, PGT, LT Grade भर्ती वर्षों से लंबित
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छात्रों की पढ़ाई पर सीधा असर
👉 शिक्षकों ने कहा कि बिना नई भर्ती के शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना असंभव है।
5️⃣ गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ
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चुनाव, सर्वे, डाटा फीडिंग, सरकारी योजनाएं
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पढ़ाई के अलावा अन्य कार्यों में समय नष्ट
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शिक्षण कार्य प्रभावित
मांग: शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित रखा जाए।
🗣️ शिक्षक संगठनों ने क्या कहा?
बैठक में मौजूद शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि—
“अगर सरकार और शिक्षा विभाग ने समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।”
शिक्षकों ने चेतावनी दी कि आने वाले समय में ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और सामूहिक निर्णय लिए जा सकते हैं।
🏫 शिक्षा व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो—
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शिक्षकों का मनोबल और कार्यक्षमता घटेगी
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छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी
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सरकारी स्कूलों की छवि कमजोर होगी
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निजी स्कूलों की ओर पलायन बढ़ेगा
✅ शिक्षकों की प्रमुख मांगें (संक्षेप में)
✔ समय पर वेतन और एरियर भुगतान
✔ पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू हो
✔ नई शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी हो
✔ पारदर्शी ट्रांसफर नीति लागू हो
✔ गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति
🔍 निष्कर्ष (Conclusion)
मेरठ में हुई यह चर्चा सिर्फ एक जिले की नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के शिक्षकों की आवाज है। यदि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना चाहती है, तो सबसे पहले शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से समझना और समाधान करना होगा।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग और राज्य सरकार इन मांगों पर कब और क्या ठोस कदम उठाती है।