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टीईटी अनिवार्यता से छूट की कोई योजना नहीं, 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित

टीईटी अनिवार्यता से छूट की कोई योजना नहीं, 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित


शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन केंद्र सरकार ने संसद में दिए गए अपने जवाब से इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि टीईटी को अनिवार्य योग्यता से छूट देने की कोई योजना नहीं है

संसद में केंद्र सरकार का स्पष्ट रुख

संसद में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने बताया कि टीईटी न्यूनतम और अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी। यह प्रावधान निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 के अंतर्गत लागू है।

सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना के जरिए कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य किया था।

उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख शिक्षक सीधे प्रभावित

सरकारी जवाब के बाद उत्तर प्रदेश के लगभग 1.86 लाख ऐसे शिक्षक प्रभावित माने जा रहे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी और जिन्होंने अब तक टीईटी पास नहीं की है। इन शिक्षकों में सरकार के फैसले को लेकर चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

सेवा अवधि के आधार पर क्या नियम होंगे?

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की सेवा अवधि के आधार पर नियम अलग-अलग होंगे—

🔹 जिन शिक्षकों की सेवा में 5 वर्ष से अधिक समय शेष है

ऐसे शिक्षकों को निर्णय की तिथि से 2 वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा।

🔹 जिन शिक्षकों की सेवा में 5 वर्ष से कम समय शेष है

वे बिना टीईटी पास किए सेवा में बने रह सकते हैं, लेकिन पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे

शिक्षक संगठनों में नाराज़गी

शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बाद भी टीईटी की बाध्यता शिक्षकों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डाल रही है।
उनका तर्क है कि बढ़ती उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियों और स्वास्थ्य समस्याओं के बीच परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

केंद्र सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार टीईटी को योग्यता मानक बनाए रखना आवश्यक है। शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए किसी भी प्रकार की सामूहिक छूट संभव नहीं है।

आगे क्या होगा?

सरकार के इस रुख के बाद अब शिक्षक संगठनों की आगे की रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर आंदोलन या कानूनी कदम उठाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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