Advertisement

उत्तराखंड में शिक्षकों को मिल सकता है सीधे मतदान का अधिकार, शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव

 देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव की तैयारी चल रही है। राज्य में शिक्षकों को सीधे मतदान का अधिकार दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो शिक्षक संगठन और प्रांतीय कार्यकारिणी के चुनावों में अब प्रतिनिधियों के बजाय हर शिक्षक स्वयं मतदान कर सकेगा


🔹 क्या है मौजूदा व्यवस्था?

वर्तमान समय में शिक्षक संगठनों के कई चुनावों में:

  • शिक्षकों को प्रतिनिधि (डेलीगेट) चुनने होते हैं

  • वही प्रतिनिधि आगे जाकर मतदान करते हैं

  • सभी शिक्षकों को प्रत्यक्ष रूप से वोट देने का अवसर नहीं मिल पाता

इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से पारदर्शिता और समान भागीदारी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।


🔹 प्रस्ताव में क्या बदलाव सुझाया गया है?

शिक्षा विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि:
✔️ प्रत्येक शिक्षक को मतदान का प्रत्यक्ष अधिकार दिया जाए
✔️ संगठनात्मक चुनावों में सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो
✔️ प्रतिनिधि प्रणाली की अनिवार्यता समाप्त की जाए
✔️ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जाए

इससे शिक्षक अपने नेतृत्व का चयन सीधे कर सकेंगे।


🔹 शिक्षकों को क्या लाभ होगा?

सीधे मतदान का अधिकार मिलने से:

  • सभी शिक्षकों की समान भागीदारी सुनिश्चित होगी

  • चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी

  • शिक्षक संगठनों की जवाबदेही मजबूत होगी

  • निर्णय लेने की प्रक्रिया में शिक्षकों की वास्तविक आवाज़ शामिल होगी

शिक्षक संगठनों का मानना है कि यह बदलाव लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगा।


🔹 शिक्षा व्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो:

  • शिक्षक राजनीति अधिक लोकतांत्रिक और संतुलित होगी

  • संगठनात्मक निर्णय जमीनी शिक्षकों की इच्छा के अनुरूप होंगे

  • शिक्षा व्यवस्था में विश्वास और सहभागिता बढ़ेगी


🔹 निष्कर्ष

उत्तराखंड में शिक्षकों को सीधे मतदान का अधिकार दिया जाना शिक्षा जगत के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। इससे न केवल चुनाव प्रणाली में सुधार होगा, बल्कि शिक्षकों को अपने अधिकारों के प्रति और अधिक सशक्त महसूस करने का अवसर मिलेगा। अब सभी की निगाहें शासन के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

UPTET news