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‘स्कूलों में संवाद, जिज्ञासा को जगह दें ’: माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव

 माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि पठन संस्कृति केवल एक शैक्षिक गतिविधि नहीं बल्कि विचार निर्माण, प्रश्नवाचक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास की आधारशिला

है। यदि शिक्षा व्यवस्था को भविष्य के अनुरूप बनाना है, तो विद्यालयों में पुस्तक, संवाद और जिज्ञासा को केंद्रीय स्थान देना अनिवार्य होगा। पार्थ सारथी सेन शर्मा ने माध्यमिक शिक्षा विभाग और नेशनल बुक ट्रस्ट दिल्ली मंगलवार को राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज में पठन संस्कृति उत्सव स्क्रीन की ओर विषय कार्यक्रम का उदघाटन किया।



पुस्तक प्रदर्शनी तथा विद्यार्थियों की चित्रकला प्रदर्शनी का सभी ने अवलोकन किया। विशेष कार्याधिकारी डॉ. सांत्वना तिवारी ने कहा कि पठन संस्कृति किसी एक दिन का उत्सव नहीं। बल्कि निरंतर प्रयास और सामूहिक उत्तरदायित्व है। वरिष्ठ साहित्यकार यतीन्द्र मिश्र ने पठन मनुष्य को केवल शब्द नहीं देता। उसे संवेदनशील श्रोता और विचारशील नागरिक भी बनाता है। वायलिन वादन मनरीत कौर, कथक नृत्य अग्रिका भारद्वाज, लोकनृत्य देव, कृष्णा, कुलदीप ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी।

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