राज्य की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी अमित कुमार ने तीन गवाह और अहम साक्ष्य प्रस्तुत किए।
मामले में माध्यमिक शिक्षा परिषद की उपसचिव आदि की गवाही अहम रही।
वादी सेनानायक 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद ने सात मई 1992 को थाना ताजगंज में मुकदमा दर्ज करा बताया था कि आरक्षी तुकमान सिंह वर्ष 1986 में पीएसी आगरा में 15वीं वाहिनी में भर्ती हुआ था। 13 अक्तूबर 1988 को शिकायती पत्र दिया गया। जिसमें आरोप था कि तुकमान सिंह तीन बार हाईस्कूल की परीक्षा में शामिल हुआ था और तीनों बार फेल हुआ। हाईस्कूल के जिस प्रमाण पत्र के आधार पर वह भर्ती हुआ है वह फर्जी है। प्रमाण पत्र की माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद से जांच कराई गई तो क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ से भेजी रिपोर्ट में निकल कर आया कि तुकमान द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र जाली है। आरोपी तुकमान सिंह फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर जाली प्रपत्रों से पीएसी में भर्ती हुआ। पुलिस ने धोखाधड़ी के तहत आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस टीम द्वारा दबिश देने के बाद आरोपी तुकमान सिंह ने 13 जनवरी 1993 को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। विवेचक द्वारा अहम साक्ष्य जुटा आरोपी के खिलाफ 25 मार्च 1993 में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। आरोपी नौकरी से बर्खास्त चल रहा था।

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