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11 की सुनवाई में जो हुआ वो अप्रत्याशित नही था , 26 अप्रैल उम्मीद है सब कुछ ठीक होने का वक्त आ गया है

सभी साथियों को सुप्रभात, "एक खुला संवाद" कल की सुनवाई के सन्दर्भ में, 11 की सुनवाई में जो हुआ वो अप्रत्याशित नही था।इसके एक दिन पहले कंटेम्प्ट की सुनवाई के दौरान स्टेट के तरफ से दीपक मिश्रा जी के कोर्ट में राज्य की तरफ अधिवक्ता नियुक्त न होने का बहाना बनाया गया था।और सुनवाई को एडजर्न करा लिया था।
लेकिन कल ही नही पुराने डेटों पर भीअपने केस में हमारे विद्वान पैरवी कर्ता इतनी छोटी सी बात को क्यों नही समझ पाए कि सुनवाई होने संभावना नगण्य है।एक बात और अपनी केस के और भी महत्वपूर्ण मैटर कनेक्ट है,इसलिए सुनवाई पहले होगी। हम सबके 72825 के मैटर पर सुनवाई लगभग पूर्ण हो चुकी है तभी हम यहां तक पहुँचे हैं। AOR, सबको मालूम है रजिस्टर्ड अधिवक्ता होते है।सुनवाई के दौरान वो seniour न होने का बहाना बना कर वो केस को अगली सुनवाई तक या कुछ समय के लिए सुनवाई टालने का आग्रह कर सकते है।
दोस्तों हमारी टीम ने शारदा मैडम जैसी seniour ,AOR, अधिवक्ता पर भरोसा किया।मैडम को इतना विश्वास रहता है कि जरुरत पड़ने पर रॉव सर हम सबके तरफ से वो खड़ा कर देंगी।
हमारे 3 लाख में से मात्र 20 हजार ही कटे है बाकी 2 लाख 80 हजार अभी भी मैडम के पास शेष है जो अगली डेट पर आवश्यकतानुसार खर्च होगा।
और वकीलों के पैरविकारो से निवेदन है कि दिमाग से काम ले न कि एक दुसरे को नीचा दिखाने के प्रयास में संगठन के पैसे बर्बाद करें।
फेसबुक और सोशल मीडिया में इन टीमो के द्वारा तथाकथित रूप से ब्रीफ कराये वकील आखिर कोर्ट में क्यों नही पहुँच रहे है ये चिंतन का विषय है।हर डेट पर बिना सुनवाई के इन अधिवक्ताओं की शुल्क कहाँ जा रहा है।इस बात का जवाब जब ढूढेंगे तो आपको स्वयं मिलेंगे।
जिस प्रकार आगामी 26 अप्रैल के न्यायाधीश केस को decide करने की टिप्पणी कर चुके है,उम्मीद है सब कुछ ठीक होने का वक्त आ गया है।
अचयनित याची बंधुओ से निवेदन है कि 18 के धरने को सफल बनायें।धरने से आपको बहुत कुछ तो नही मिलने वाला है लेकिन सरकार सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता जरूर नियुक्त कर देगी।
धन्यवाद।
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