लखनऊ में प्राइमरी स्कूल शिक्षकों के समायोजन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शासन और जिलाधिकारी विशाख जी के संज्ञान लेने के बाद मामले की जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। अब तक समिति को 37 से अधिक शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं।
शिक्षकों का आरोप है कि समायोजन के दौरान नियमों की अनदेखी की गई है। गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जैसे कैंसर व लकवा पीड़ित शिक्षकों को भी उनके घर से 30–40 किलोमीटर दूर तैनात कर दिया गया है, जिससे उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जांच समिति में सीडीओ अजय जैन, एडीएम सिविल सप्लाई और बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य न केवल शिकायतों की जांच करना है, बल्कि नियम विरुद्ध हुए समायोजन में सुधार भी करना है।
शिक्षकों का कहना है कि नियमों के अनुसार यदि किसी जोन में स्थान उपलब्ध न हो तो नजदीकी जोन में समायोजन किया जाना चाहिए था, लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं हुआ। उदाहरण के तौर पर जोन-1 के शिक्षकों को सीधे जोन-4 में तैनात कर दिया गया, जिससे उनकी यात्रा दूरी अत्यधिक बढ़ गई।
बीएसए ने यू-डायस पोर्टल के माध्यम से नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के बंद व एकल प्राइमरी स्कूलों में 170 शिक्षकों का समायोजन किया था। इसके विरोध में बीएसए कार्यालय में पांच दर्जन से अधिक प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों ने आपत्ति दर्ज कराई है।
शिक्षकों का कहना है कि इस तरह के गलत समायोजन का असर न केवल शिक्षकों पर बल्कि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ेगा।
📝 मुख्य बिंदु (Key Highlights)
37 से अधिक शिकायतें जांच समिति को प्राप्त
कैंसर व लकवा पीड़ित शिक्षकों को दूरस्थ तैनाती
जोन नियमों की अनदेखी का आरोप
170 शिक्षकों का यू-डायस पोर्टल से समायोजन
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका
📌 संक्षिप्त सार (Short Summary)
लखनऊ में प्राइमरी स्कूल शिक्षकों के समायोजन में नियमों की अनदेखी के आरोपों के बाद सीडीओ की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई है। 37 से अधिक शिकायतों में गंभीर बीमारी से ग्रस्त शिक्षकों को दूर तैनाती देने और जोन नियम तोड़ने का आरोप है।