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🔴 प्रधानाध्यापकों को मिल रहा प्रबंधन और नेतृत्व का विशेष प्रशिक्षण, सीमेट प्रयागराज में शुरू हुआ कार्यक्रम

 प्रयागराज स्थित राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीमेट) में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के नवपदोन्नत प्रधानाध्यापकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह प्रशिक्षण उन अधिकारियों के लिए है, जो प्रवक्ता पद से पदोन्नत होकर प्रधानाध्यापक बने हैं और अब उन्हें शिक्षण के साथ-साथ प्रशासनिक एवं प्रबंधकीय जिम्मेदारियां भी निभानी हैं।

📚 शैक्षिक प्रबंधन और नेतृत्व क्षमता पर फोकस

यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शैक्षिक प्रबंधन, नेतृत्व विकास, प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित है। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानाध्यापकों को विद्यालय संचालन के आधुनिक तरीकों से परिचित कराना है।

👥 पहले बैच में 8 जिलों के 60 प्रधानाध्यापक शामिल

प्रशिक्षण के पहले बैच में आठ जिलों से आए 60 प्रधानाध्यापक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सीमेट के अपर निदेशक रामशरण सिंह ने कहा कि प्रधानाध्यापक के पद पर रहते हुए शिक्षण के साथ-साथ—

  • प्रशासनिक कार्य

  • वित्तीय प्रबंधन

  • मानव संसाधन प्रबंधन

  • विद्यालय विकास योजना

जैसे कई महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करना होता है, जिनकी प्रभावी समझ यह प्रशिक्षण प्रदान करेगा।

🎓 विशेषज्ञों द्वारा मिलेगा व्यावहारिक मार्गदर्शन

अपर निदेशक ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान—

  • विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर

  • विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी

अलग-अलग सत्रों में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगे। प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण के दौरान अधिक से अधिक प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, ताकि वे नीतिगत और व्यवहारिक दोनों स्तरों पर बेहतर समझ विकसित कर सकें।

🧩 प्रशिक्षण की रूपरेखा और अवधि

सीमेट के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित खन्ना ने प्रशिक्षण की विस्तृत रूपरेखा और विषयवस्तु पर प्रकाश डाला। वहीं कार्यक्रम समन्वयक प्रभात कुमार मिश्र ने बताया कि यह प्रशिक्षण कई चरणों में संचालित किया जाएगा और 3 फरवरी तक चलेगा।

👨‍🏫 अन्य अधिकारी भी रहे उपस्थित

इस अवसर पर सीमेट के संकाय सदस्य सरदार अहमद, बी.आर. आब्दी सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।


📌 निष्कर्ष

यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रधानाध्यापकों को प्रभावी नेतृत्वकर्ता और कुशल प्रशासक के रूप में तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की कार्यप्रणाली और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

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