आज का शिक्षक: सिर्फ पढ़ाने वाला नहीं, हर कमी का बोझ उठाने वाला
आज का शिक्षक अब केवल कक्षा में पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं रह गया है।
वह धीरे-धीरे व्यवस्था की हर विफलता का सबसे आसान कंधा बना दिया गया है।
एक तरफ कक्षा में बैठे बच्चे हैं—
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जिनके भविष्य की जिम्मेदारी
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संविधान, समाज और शिक्षा नीति
तीनों ने शिक्षक को सौंपी है
और दूसरी तरफ—
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BLO (Booth Level Officer)
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मतदाता सूची पुनरीक्षण
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घर-घर सर्वे
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ऑनलाइन डेटा अपलोड
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दावा-आपत्ति
जैसे गैर-शैक्षणिक कार्य
यहीं से शुरू होता है BLO बनाम Teacher का मौन संघर्ष।
बच्चों की पढ़ाई या BLO का काम? यही असली द्वंद्व है
लगभग हर शिक्षक आज अंदर ही अंदर यह सवाल खुद से पूछ रहा है—
“क्या मैं बच्चों को पढ़ाऊँ या लोकतंत्र की ड्यूटी निभाऊँ?”
यह कोई नारा नहीं, बल्कि रोज़ का मानसिक संघर्ष है।
RTE Act 2009 क्या कहता है और हकीकत क्या है
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 साफ-साफ कहता है कि—
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शिक्षकों से
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गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं लिए जाने चाहिए
उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट था—
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शिक्षक का पूरा समय
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बच्चों की सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को मिले
लेकिन ज़मीनी सच्चाई ठीक उलट है।
BLO ड्यूटी: महीनों तक स्कूल से बाहर शिक्षक
मतदाता सूची से जुड़े कार्यों में शिक्षक—
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महीनों तक स्कूल से बाहर रहते हैं
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कक्षा खाली
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पाठ्यक्रम अधूरा
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परीक्षा सिर पर
सबसे बड़ा नुकसान होता है—
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सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले
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वही बच्चे जो पहले से
संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी झेल रहे हैं
पढ़ाई की भरपाई
👉 कोई आदेश, कोई सर्कुलर, कोई मीटिंग नहीं कर सकती।
BLO कार्य जरूरी है, लेकिन शिक्षक ही क्यों?
इसमें कोई दो राय नहीं कि—
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BLO का कार्य लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है
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शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है
लेकिन सवाल यह है—
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क्या शिक्षक ही इसका एकमात्र विकल्प हैं?
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क्या प्रशासन के पास
अलग, स्थायी और प्रशिक्षित स्टाफ नहीं होना चाहिए?
जब शिक्षक गांव-गली घूम रहा होता है,
तो स्कूल में बैठे बच्चे किससे पूछेंगे सवाल?
सबसे दुखद पहलू: शिक्षक की पीड़ा कहीं दर्ज नहीं
पूरी व्यवस्था में—
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ऊपर से आदेश आता है
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नीचे पालन होता है
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बीच में पिसता है शिक्षक
अगर वह बोले—
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“बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है”
तो जवाब मिलता है—
शासकीय कार्य में बाधा
अगर चुपचाप BLO का काम करे—
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तो उसका अंतरात्मा
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रोज़ उसे कटघरे में खड़ा करती है
यही है अदृश्य मानसिक संघर्ष,
जिसे बाहर से कोई नहीं देखता।
समाधान टकराव में नहीं, सिस्टम सुधार में है
यह लड़ाई BLO बनाम Teacher की नहीं होनी चाहिए।
समाधान पूरी तरह संभव है—
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BLO के लिए स्थायी कैडर
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स्थानीय स्तर पर अलग स्टाफ
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डिजिटल सहयोगी व्यवस्था
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शिक्षकों को केवल आपात स्थिति में, सीमित समय के लिए शामिल करना
बस जरूरत है—
👉 नीतिगत इच्छाशक्ति की।
निष्कर्ष: शिक्षक कक्षा में होगा, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा
शिक्षक को मजबूर करना कि वह—
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शिक्षा और लोकतंत्र
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दोनों में से किसी एक को चुने
👉 न नीति के हित में है
👉 न देश के भविष्य के
आज जरूरत है यह समझने की कि—
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शिक्षक का प्राथमिक धर्म पढ़ाना है
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जब शिक्षक कक्षा में होगा
तभी जागरूक मतदाता
और जिम्मेदार नागरिक तैयार होंगे
वरना यह BLO बनाम Teacher का मौन युद्ध चलता रहेगा
और हार हर बार—
👉 बच्चों की होगी