त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से दाखिल किए जाने वाले शपथपत्र पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं। आयोग के जवाब पर हाई कोर्ट द्वारा दिए जाने वाले आदेश से स्पष्ट होगा कि यह चुनाव कब होगा।
सूत्र बताते हैं कि सरकार व आयोग की तरफ से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) और जनगणना के प्रथम चरण के कार्यक्रम का हवाला देते हुए चुनाव कार्यक्रम अभी घोषित नहीं करने का तर्क दिया जा सकता है। हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार का अगला कदम निर्भर करेगा।पंचायत चुनाव को लेकर
हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं। इसमें निर्वाचन आयोग को यह बताना होगा कि 15 अप्रैल को मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद क्या चुनाव 26 मई तक करा पाना संभव है। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार अभी पंचायत चुनाव को कराने की नहीं सोच रही है। राज्य में अभी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) का कार्यक्रम 10 अप्रैल तक चलेगा। इसके बाद जनगणना के प्रथम चरण का कार्यक्रम 22 मई से
शुरू होकर 20 जून तक है। यह दोनों ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनमें वे सभी कर्मचारी ड्यूटी पर लगाए गए हैं, जिन्हें चुनाव कार्यक्रम में लगाया जाता है।
इन दोनों कार्यक्रमों के अलावा चुनाव कराने में सबसे बड़ी बाधा पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं किया जाना है। गठन किए जाने पर आयोग को काम करने के लिए कम से कम दो महीने का समय चाहिए। आयोग की रिपोर्ट यदि दो महीने में आ भी जाए तो सीटों का आरक्षण तय करने के लिए एक महीने का समय और चाहिए। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने के लिए न्यूनतम 35 दिन का समय चाहिए। यह सब होते होते बारिश का मौसम आ जाएगा और पंचायत चुनाव इस मौसम में कराने में व्यावहारिक कठिनाइयां आएंगी। इन तमाम व्यवधानों के कारण राजनीतिक जानकार पंचायत चुनाव की संभावना राज्य विधान सभा चुनाव के बाद देख रहे हैं।
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