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शिक्षकों को चल-अचल संपत्ति की जानकारी देने के निर्देश पर असमंजस में शिक्षक

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद : शासकीय और अशासकीय कालेज के शिक्षकों को चल-अचल संपत्ति की जानकारी देने के निर्देश पर उप्र शिक्षक संघ के विरोध के बाद रोक लग गई है। पहले उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी रोकने के लिए कालेजों को पत्र जारी किया गया था।
कुछ शिक्षकों द्वारा छह अप्रैल से पहले ही जानकारी भेज देने के कारण असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
समय-समय पर कालेजों में घोटालों की गूंज उठती रहती है। छात्रों से रिश्वतखोरी कर या फिर अन्य तरीकों से शिक्षकों द्वारा आय से अधिक संपत्ति एकत्र करने के मामले भी सामने आते हैं। ऐसी घटनाओं पर शिकंजा कसने के लिए सिर्फ शिक्षक ही नहीं, बल्कि शिक्षणेत्तर कर्मचारियों से भी ब्योरा मांगा गया था।
घोषणा पत्र में भरनी थी जानकारी
-अचल संपत्ति, शेयर या इन्वेस्टमेंट की जानकारी भरने के लिए एक घोषणा पत्र दिया गया था। इसमें संबंधित व्यक्ति को व्यक्तिगत पते की जानकारी सहित भू-संपत्ति (अर्जित या पैतृक) में वार्षिक राजस्व, अनुमानित मूल्य के अलावा अन्य विवरण भरना था। वहीं गृह संपत्ति में खुद के रहने के अलावा किराये पर देने के बाद वार्षिक किराया, अनुमानित मूल्य की जानकारी को शामिल करना था। घोषणा पत्र में बंधक या फिर पट्टे पर दिए गए घर या भू-संपत्तियों को भी शामिल किया गया था। संयुक्त परिवार में रहने पर घोषणा में प्रबंध करने की समझी जानी थी।
शेयर के साथ इन्वेस्टमेंट के आंकड़े शामिल
-यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी शेयर का स्वामी है तो अर्जित करने की तारीख के साथ प्रत्येक शेयर का मूल्य और शेयर की संख्या सहित कुल मूल्य की जानकारी देनी थी। वहीं इन्वेस्टमेंट करने की तारीख के साथ मूल्य को भी उजागर करना था।
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वर्जन..
शासन से पत्र आने के बाद ही सभी शिक्षकों से जानकारी लेकर तीन अप्रैल को भेज दी गई थी। कुछ शिक्षक रह गए थे, उनकी जानकारी भी छह अप्रैल को भेज दी है।
-डॉ. अंजना दास, प्राचार्य, गोकुलदास ¨हदू ग‌र्ल्स कालेज।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक संघ के विरोध के बाद प्रदेश सरकार ने आदेश पर रोक लगा दी है। अब सिर्फ राजकीय कालेज के शिक्षकों को ही जानकारी देनी है। अशासकीय शिक्षक सरकारी कर्मचारी घोषित नहीं हैं, इसलिए द्वंद्व की स्थिति है।

-डॉ. विशेष गुप्ता, प्राचार्य, एमएच कालेज।
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