इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्राथमिक व उच्च
प्राथमिक स्कूलों के अध्यापकों व स्टाफ का कम्प्यूटराइज्ड डाटा उपलब्ध है
या नहीं। यदि नहीं है तो कितने समय में डाटा तैयार कर लिया जाएगा। कोर्ट ने
कहा कि छात्र संख्या के आधार पर अध्यापक व स्टाफ होना चाहिए ताकि सरकारी
खजाने पर अनावश्यक बोझ न पड़े। इसलिए इसका कम्प्यूटराइज्ड डाटा होना चाहिए।
यह
आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी ने प्रबंध समिति नागेश्वर प्रसाद पीएमवी
स्कूल देवरिया की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि अनिवार्य
शिक्षा कानून के तहत शिक्षा सत्र शुरू होते ही अध्यापकों की जरूरत पूरी
करने में बाधा पहुंचाने वाले अधिकारियों पर क्या अर्थदंड लगाया जाना चाहिए
ताकि शिक्षक व स्टाफ की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। कोर्ट ने
प्रमुख सचिव व बीएसए से अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है और
महाधिवक्ता से सरकार का पक्ष रखने का आग्रह किया है। कोर्ट ने यह भी पूछा
कि शिक्षा सत्र में कितने शिक्षक व स्टाफ रिटायर हो रहे हैं। यह भी पूछा है
कि क्या अध्यापक या स्टाफ का पद रिक्त होते ही स्वत: ही रिक्त पदों को
भरने का सिस्टम बनाया जा सकता है ताकि पद रिक्त होने पर भर्ती विज्ञापन के
लिए अधिकारियों से अनुमति लेने का जरूरत न पड़े। याचिका में कहा गया है कि
अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत बच्चों को शिक्षा पाने का अधिकार है। लेकिन
भर्ती का विज्ञापन निकालने की अनुमति न मिलने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो
रही है।
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