गौरव दुबे, अलीगढ़ : निजी स्कूलों में भी भर्ती घोटाला हो गया है। यह
वहां हुआ, यहां जूनियर सेक्शन को ग्रांट मिलती थी, किंतु प्राइमरी सेक्शन
को नहीं। अधिकांश के यहां प्राइमरी सेक्शन कागजी थे। कानूनी लड़ाई जीतने पर
प्राइमरी कक्षाओं को ग्रांट की छूट मिली तो शिक्षा विभाग से साठ-गांठ करके न
सिर्फ फर्जी रिकार्ड तैयार कराया, बल्कि शासन तक को गुमराह किया।
यहां
15-20 लाख रुपये रिश्वत लेकर शिक्षक भर्ती किए जा रहे हैं। ऐसा मामला मिलने
पर बीएसए ने जनता जूनियर हाईस्कूल सालारपुर की ग्रांट रोक दी है। वेतन न
देने का आदेश दिया है। वहीं, जनता जूनियर हाईस्कूल गंगीरी में भी ऐसे ही
फर्जीवाड़े की सीएम से शिकायत हुई है। यहां कई शिक्षकों की भर्ती हो चुकी
है। पर, यहां से रिटायर्ड शिक्षक ही प्राइमरी सेक्शन चलने से बेखबर हैं।
जनता जूनियर हाईस्कूल गंगीरी के प्रधानाध्यापक ऋषिपाल सिंह ने केंद्र
सरकार को यू-डायस प्रपत्र में जो ब्योरा दिया है, वही फर्जीवाड़े की
पुष्टि-सी करता है। यह बताता है कि पिछले पांच साल तक उनके यहां न तो
प्राइमरी का कोई बच्चा पढ़ा, न ही कोई शिक्षक था। यहां जूनियर हाईस्कूल (छह
से आठ) चला। यू-डायस पर प्राइमरी का डाटा शून्य होकर भी बीएसए ने पिछले
साल पांच अक्टूबर-17 को शिक्षा निदेशक को जो रिपोर्ट भेजी, उसमें वर्ष
2012-13 में 466, 2013-14 में 455, 2014-15 में 471, 2015-16 में 470 और
2016-17 में 462 बच्चे पढ़ते दिखा दिए।
हालांकि, जनता जूनियर हाईस्कूल गंगीरी के संरक्षक लक्ष्मण प्रसाद यादव
दावे से कहते हैं कि प्राइमरी व जूनियर दोनों स्कूल वर्ष 1966 से ही चल रहे
हैं। मैनेजमेंट का विवाद होने की वजह से कुछ लोग झूठे आरोप लगाते रहते
हैं।
पूर्व शिक्षक बेखबर : सुरेशपाल सिंह बताते हैं कि मैंने 1976 से 2014
तक शिक्षण किया है। सिर्फ चार साल ही प्राइमरी चला। जूनियर की मान्यता होने
पर आगे इसी की पढ़ाई हुई। प्राइमरी स्कूल कभी न चला। विद्यारतन माहेश्वरी
कहते हैं, जुलाई 1970 से 2007 तक पढ़ाया है। इस दौरान जनता जूनियर हाईस्कूल
में प्राइमरी कक्षाएं नहीं लगीं।
क्या है खेल : छठवीं से आठवीं तक के कुछ निजी स्कूलों शिक्षकों के वेतन
व अन्य खर्चो के लिए सरकार अनुदान देती है। ये प्राइमरी स्कूल के लिए भी
अनुदान मांग रहे थे। लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची और ये जीत गए। सूत्र
बताते हैं कि जिले के 12 स्कूलों ने भी रिट दायर की। इसमें नौ को ग्रांट
मंजूर हो चुकी है। इसके लिए बच्चों का फर्जी डाटा तैयार हुआ। शिक्षकों के
फर्जी नाम तय किए गए। इन्हें सरकारी नौकरी देने के बदले अब 15 से 20 लाख
रुपये लिए जा रहे हैं। इसके लिए रिकार्ड में हेराफेरी की जा रही है। पुराने
रिकार्ड पर दस्तखत के लिए शिक्षकों को धमकियां भी दी जा रही हैं। -------
जनता जूनियर हाईस्कूल गंगीरी में प्राइमरी कक्षाएं न चलते हुए भी
सैकड़ों बच्चों का दाखिला दिखाकर अनुदान पाना बेहद गंभीर मामला है। इसकी
जांच कराऊंगा। यू-डायस से इनके डाटा का मिलान करूंगा। बच्चों के नाम,
सीरियल नंबर, हाजिरी रजिस्टर देखने के साथ गांव के लोगों से भी इसकी तस्दीक
करूंगा कि क्या वहां कभी प्राइमरी सेक्शन चला है? जो भी सत्यता मिलेगी,
उसके हिसाब से कार्रवाई करूंगा। गड़बड़ी मिली तो ग्रांट रोकेंगे, शासन को भी
लिखेंगे।
डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए
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