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विद्यालयों में जब शिक्षक ही कम हैं तो कैसे हो बच्चों की पढ़ाई

प्रयागराज : सरकार का पूरा जोर विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने पर है, लेकिन जिले में कई माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैैं जिनमें पर्याप्त संख्या में शिक्षक ही नहीं हैैं। इनमें संबंधित विषयों के शिक्षकों की भी कमी है, जिसकी वजह से एक ही शिक्षक कई विषयों की पढ़ाई करा रहे हैैं।
ज्यादा समस्या ग्रामीण इलाकों के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में हैैं, जहां दो-चार शिक्षकों के भरोसे पूरी पढ़ाई चल रही है। अब जबकि विद्यालयों में अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र प्रारंभ होने वाला है, ऐसे में इस बार भी शिक्षकों की कमी बनी रहेगी।

नियम है, 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक
नियम के तहत माध्यमिक विद्यालयों में 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन जिले के विद्यालयों में इसका पालन नहीं हो रहा है। इसका असर पठन-पाठन पर पड़ रहा है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल रही है। करछना के बेनीपुर स्थित परमेश्वरदीन मिश्र इंटर कॉलेज में करीब 1000 विद्यार्थियों पर मात्र चार शिक्षक हैैं। यहीं के बेलसारा में गांधी इंटर कॉलेज में मात्र दो शिक्षक करीब 700 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैैं। यही हाल हंडिया के आमीपुर धनुपुर स्थित सरयु प्रसाद इंटर कॉलेज का है, जहां करीब 900 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए चार शिक्षक हैैं। यहीं धनुपुर के इमामगंज स्थित जनता इंटर कॉलेज में करीब 1200 विद्यार्थियों को मात्र आठ शिक्षक पढ़ा रहे हैैं।


विज्ञान, गणित व अंग्रेजी विषयों के शिक्षकों की कमी

इन सभी विद्यालयों में विज्ञान, गणित, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी है। ङ्क्षहदी, सामाजिक विज्ञान, कला आदि विषयों के शिक्षक विद्यार्थियों को अन्य विषय पढ़ा रहे हैैं। ऐसे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए सेवानिवृत अध्यापकों को मानदेय पर नियुक्ति करने की योजना बनाई गई लेकिन ज्यादातर विद्यालयों में ऐसी व्यवस्था नहीं की गई।

विद्यालयों में शिक्षकों की समस्या समाप्त हो जाएगी : डीआइओएस

डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने 2016 शिक्षक भर्ती के लिए परीक्षा हाल में कराई है। इसका परिणाम नहीं आया है। इसके बाद साक्षात्कार भी होना है। इसमें एलटी के करीब 7500 एवं लेक्चरर के 3000 पद हैैं। इसके अलावा लोकसेवा आयोग से करीब 11000 पदों का परिणाम घोषित होना है। यह काम जल्दी हो जाए तो विद्यालयों में शिक्षकों की समस्या समाप्त हो जाएगी। मानदेय पर 144 सेवानिवृत्त शिक्षकों को नियुक्त किया गया था। इनके भुगतान में विलंब हुआ लेकिन अब मानदेय का भुगतान किया जा रहा है।

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