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दिव्यांग कोटे के अंतर्गत नौकरी पाने वाले परिषदीय शिक्षकों की दिव्यांगता की फिर होगी जांच

 लखीमपुर खीरी

जिले में करीब दो साल पहले दिव्यांग कोटे से तैनात हुए 44 शिक्षकों की दिव्यांगता का सत्यापन सीएमओ कार्यालय में गठित टीम से कराया गया। सत्यापन रिपोर्ट में कुछ की दिव्यांगता संदिग्ध दिखाई गई जिस पर इन शिक्षकों ने बीएसए को फिर से प्रार्थनापत्र देकर दिव्यांगता का सत्यापन कराने की मांग की।



इस पर बीएसए डॉ.लक्ष्मीकांत पाण्डेय ने सीएमओ को पत्र लिखा। लेकिन टीम न बनने व समय न मिलने पर बीएसए ने सीएमओ को दुबारा पत्र लिखकर पहली सूची के 44 और नई भर्ती के 19 शिक्षकों की दिव्यांगता का परीक्षण मेडिकल बोर्ड से कराने के लिए कहा है। हालांकि अभी सीएमओ ने कोई डेट फाइनल नहीं की है।

बेसिक शिक्षा विभाग में करीब दो साल पहले तैनात हुए शिक्षकों में से 44 शिक्षक दिव्यांग कोटे से तैनात हुए। इनमें दृष्टि बाधित और श्रवण बाधित शिक्षकों की दिव्यांगता संदेह के घेरे में आई तो तत्कालीन बीएसए ने सीएमओ को पत्र लिखकर मेडिकल बोर्ड से इनका परीक्षण कराने को कहा। सीएमओ कार्यालय में बोर्ड गठित कर सत्यापन हुआ। इसमें कुछ शिक्षकों की दिव्यांगता परीक्षण पर अभ्यर्थियों ने ही संदेह जताया और इनका पुन: परीक्षण कराने का अनुरोध किया। बताते हैं कि करीब 15 शिक्षकों की दिव्यांगता की जांच के लिए लखनऊ बोर्ड को रेफर किया गया था जिसके बाद इन शिक्षकों ने ही प्रार्थनापत्र देकर जिला स्तर पर ही फिर से जांच कराने की मांग की। इस पर बीएसए डॉ.लक्ष्मीकांत पांडेय ने पहले नौ अगस्त को सीएमओ को पत्र लिखा था बाद में उन्होंने 10 सितम्बर को फिर से सीएमओ को पत्र लिखकर इन शिक्षकों की दिव्यांगता की जांच मेडिकल बोर्ड से कराने को कहा है। हालांकि सीएमओ ने अब तक न तो मेडिकल बोर्ड का गठन किया है और न ही डेट तय की गई है।

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