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स्कूल में शिक्षक की जरूरत नहीं, फिर भी किया तबादला

 प्रयागराज। अभी राजकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों के तबादले में मनमानी का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के स्थानान्तरण में अनियमितता की शिकायतें होने लगी है।

14 जून को जारी राजकीय विद्यालयों के 372 शिक्षकों की सूची में उन स्कूलों में भी शिक्षकों का तबादला कर दिया गया है, जहां आवश्यकता ही नहीं थी। ऑनलाइन व्यवस्था ही पूरी तरह से सवालों के घेरे में खड़ी है क्योंकि उन स्कूलों में भी शिक्षकों का ट्रांसफर हुआ है जिनकी रिक्ति पोर्टल पर प्रदर्शित ही नहीं थी। यही नहीं स्थानान्तरण में 20 मई को जारी शासनादेश का भी जमकर उल्लंघन किया गया है।



राजकीय हाईस्कूल भौली मीरजापुर में अंग्रेजी के सहायक अध्यापक मिथलेश कुमार यादव का तबादला राजकीय हाईस्कूल भकुरा जौनपुर कर दिया गया। जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानान्तरित विद्यालय में पांच शिक्षक पहले से कार्यरत हैं और इस स्कूल की रिक्ति पोर्टल पर प्रदर्शित भी नहीं की गई थी। राजकीय इंटर कॉलेज बाराबंकी की शारीरिक शिक्षा विषय की सहायक अध्यापिका शैलजा का ट्रांसफर राजकीय हाईस्कूल मवई लखनऊ कर दिया गया। जबकि डीआईओएस लखनऊ की रिपोर्ट पर सामाजिक विषय और विज्ञान विषय की रिक्ति पोर्टल पर प्रदर्शित की गई थी। शारीरिक शिक्षा की रिक्ति नहीं होने के बावजूद ट्रांसफर आदेश जारी हो गया।


राजकीय हाईस्कूल बदराव मथुरा में अंग्रेजी की सहायक अध्यापिका विनीता शर्मा का तबादला राजकीय हाईस्कूल बछगांव मथुरा कर दिया गया। जबकि वहां पहले से छह शिक्षक कार्यरत थे और इस स्कूल की कोई रिक्ति पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं थी। ऐसे कई मामले हैं, जिनमें पोर्टल पर रिक्ति नहीं होने के बावजूद तबादला कर दिया गया। राजकीय हाईस्कूल गुगरापुर कन्नौज में कार्यरत चार शिक्षिकाओं में से दो का तबादला कर दिया गया। जबकि स्थानान्तरण नीति के अनुसार किसी विद्यालय में तीन से कम शिक्षक नहीं होने चाहिए। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज दुद्धी सोनभद्र में संस्कृत की सहायक अध्यापिका कुसुम सिंह ने मिर्जापुर के तीन विद्यालयों में रिक्ति के सापेक्ष ट्रांसफर के लिए आवेदन किया लेकिन उनका आवेदन निरस्त हो गया। जबकि अन्य शिक्षिकाओं का तबादला कर दिया गया। शिक्षा निदेशालय में अपर शिक्षा निदेशक राजकीय कार्यालय में ऐसी दर्जनों शिकायतें पहुंच चुकी है और कुछ शिक्षक इस मनमानी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका करने की तैयारी में है।

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