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डिजिटल हाजिरी लागू करना बेसिक शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती, शिक्षकों में बढ़ा विरोध

 UP Basic Education News:

बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की ऑनलाइन/डिजिटल उपस्थिति लागू करना आसान नहीं दिख रहा है। शासन की ओर से आदेश जारी होने के बावजूद स्कूल शिक्षा महानिदेशालय को इसे ज़मीनी स्तर पर लागू करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, प्रदेश भर में शिक्षक और शिक्षक संगठन डिजिटल हाजिरी के खिलाफ खुलकर विरोध जता रहे हैं।

शिक्षक संगठनों में गहराता असंतोष

शिक्षक संगठनों का मानना है कि डिजिटल हाजिरी का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं, बल्कि शिक्षकों पर निगरानी और दंडात्मक नियंत्रण स्थापित करना है। इसी कारण कई संगठनों ने शासन को 30 बिंदुओं पर आपत्तियां भेजी हैं, जबकि कुछ संगठन इस आदेश के खिलाफ न्यायालय जाने की तैयारी में भी हैं।

सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया

डिजिटल हाजिरी को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिक्षकों की नाराजगी साफ देखी जा सकती है। व्हाट्सएप और फेसबुक ग्रुपों में इस आदेश के खिलाफ लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विशेष रूप से उस कमेटी में शामिल 6–7 शिक्षकों को लेकर गुस्सा है, जिन पर डिजिटल हाजिरी की संस्तुति देने का आरोप है। कई शिक्षक यह आरोप लगा रहे हैं कि इन शिक्षकों और शिक्षक नेताओं को अधिकारियों द्वारा उपकृत कराकर 6 लाख शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा निर्णय कराया गया।

संतुलित बयान दे रहे कुछ संगठन

विरोध के बीच कुछ संगठन संतुलित रुख भी अपना रहे हैं।
यूपी बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कमेटी का गठन किया गया था और बैठक भी हुई, लेकिन शासन ने शिक्षकों की मूल समस्याओं को नजरअंदाज करते हुए ऑनलाइन हाजिरी का आदेश जारी कर दिया।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें

अनिल यादव सहित कई शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि डिजिटल हाजिरी लागू करने से पहले:

  • आकस्मिक अवकाश के अतिरिक्त 30 अर्जित अवकाश (EL)

  • 14 हाफ डे अवकाश

  • चिकित्सा सुविधा

  • विपरीत परिस्थितियों में राहत देने वाली व्यवस्थाएं

लागू की जाएं, ताकि शिक्षक समय पर विद्यालय न पहुंच पाने की स्थिति में इन सुविधाओं का उपयोग कर सकें।

गुणवत्ता नहीं, निगरानी बन गई डिजिटल हाजिरी?

कई संगठनों का स्पष्ट कहना है कि डिजिटल उपस्थिति का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना नहीं, बल्कि निगरानी और दंड बन गया है। यह व्यवस्था शिक्षक-छात्र के पवित्र रिश्ते में भी बाधा उत्पन्न करती है।
इसी कारण प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल हाजिरी को बंद करने या पुनर्विचार की मांग तेज होती जा रही है।

30 बिंदुओं का ध्यानाकर्षण पत्र भेजा

डिजिटल हाजिरी के विरोध में शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा महानिदेशालय को 30 बिंदुओं का ध्यानाकर्षण पत्र भी भेजा है, जिसमें व्यावहारिक समस्याओं, तकनीकी दिक्कतों और शिक्षक हितों की अनदेखी का उल्लेख किया गया है।

निष्कर्ष

डिजिटल हाजिरी को लेकर उपजे विवाद ने यह साफ कर दिया है कि बिना शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किए कोई भी तकनीकी व्यवस्था लागू करना व्यवहारिक नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गंभीर रूप ले सकता है।

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