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🔴 आरक्षण के मुद्दे पर विधान परिषद में हंगामा, सपा का वॉकआउट

✍️ लखनऊ।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद में बुधवार को नौकरियों में आरक्षण को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने सरकार पर आरक्षण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। सपा सदस्य नेता सदन के जवाब से असंतुष्ट नजर आए।


🗣️ नेता सदन के बयान पर सपा नाराज़

नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने सपा द्वारा उठाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि—

“आरक्षण के मामले में सभी नियमों का पालन किया जा रहा है। किसी भी पद पर आरक्षण की चोरी नहीं होने दी जाएगी। अगर एक पद भी है, तो वहां भी आरक्षण पूरी ईमानदारी से लागू होगा।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान सुरक्षित है और आरक्षण भी सुरक्षित है


📊 आरक्षण का पूरा विवरण

नेता सदन ने सदन में आरक्षण का पूरा ब्योरा रखते हुए कहा—

  • 🟡 पिछड़ा वर्ग (OBC) – 27%

  • 🔵 अनुसूचित जाति (SC) – 21%

  • 🟢 अनुसूचित जनजाति (ST) – 2%

  • 🔴 आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण (EWS) – 10%

उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।


⚠️ सपा ने उठाया कार्यस्थगन प्रस्ताव

इससे पहले सपा ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत नौकरियों में आरक्षण का मुद्दा उठाया।

  • सपा सदस्य किरणपाल कश्यप और मान सिंह ने आरोप लगाया कि

    “नौकरियों में आरक्षण पर डकैती डाली जा रही है।”

  • उन्होंने लेखपाल भर्ती और RO-ARO भर्ती का हवाला देते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।

नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने भी कहा कि सरकार दलितों और ओबीसी के आरक्षण नियमों का पालन नहीं कर रही है।


🏛️ लेखपाल भर्ती पर सरकार का जवाब

इस पर नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा—

“हर बात के दो पक्ष होते हैं। लेखपाल भर्ती मामले में मैंने और मुख्यमंत्री ने खुद निर्देश दिए हैं कि दोबारा विज्ञापन जारी किया जाए।”


🚨 पहले भी बाहर निकाले जा चुके हैं नेता प्रतिपक्ष

यह पहला मौका नहीं है जब विधान परिषद में ऐसा हुआ हो।
19 फरवरी, बजट सत्र के दौरान भी महाकुंभ पर चर्चा का समय बढ़ाने की मांग को लेकर नेता प्रतिपक्ष को मार्शल द्वारा सदन से बाहर किया गया था।


🔍 राजनीतिक संकेत

इस घटनाक्रम से साफ है कि आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में और अधिक गरमाने वाला है।

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