उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने इस मामले में आगे की कार्यवाही पर लगी रोक (स्टे) को 2 फरवरी तक बढ़ा दिया है। इससे समायोजन प्रक्रिया से प्रभावित शिक्षकों को फिलहाल राहत मिली है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक समायोजन से संबंधित कोई भी नई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
⚖️ क्या है पूरा मामला?
यह मामला प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के समायोजन-3 से जुड़ा हुआ है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि:
-
समायोजन प्रक्रिया नियमों के विपरीत है
-
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) और अन्य नियमों का उल्लंघन किया गया
-
कई शिक्षकों के अधिकार प्रभावित हुए
इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
🧾 आज की सुनवाई में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान:
-
राज्य सरकार की ओर से काउंटर दाखिल किया गया
-
कोर्ट ने काउंटर को अपर्याप्त माना
-
सभी पक्षों को रिजॉइंडर दाखिल करने का समय दिया गया
-
अगली सुनवाई की तिथि 2 फरवरी तय की गई
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि तब तक पूर्व में दिया गया स्टे आदेश प्रभावी रहेगा।
⏳ स्टे जारी रहने का क्या मतलब है?
स्टे जारी रहने से:
-
समायोजन प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक रहेगी
-
शिक्षकों का स्थानांतरण या समायोजन नहीं होगा
-
प्रभावित शिक्षक मौजूदा तैनाती पर बने रहेंगे
यह आदेश हजारों प्राथमिक शिक्षकों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।
👨🏫 शिक्षकों में बढ़ी उम्मीद
प्रदेशभर के शिक्षक और शिक्षक संगठन इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। शिक्षकों को उम्मीद है कि अगली सुनवाई में:
-
कोर्ट मामले की गहराई से समीक्षा करेगा
-
नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा
-
शिक्षकों के हितों की रक्षा होगी