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एसआईआर में शिक्षकों की ड्यूटी से पढ़ाई बेपटरी

  एसआईआर में शिक्षकों की ड्यूटी से पढ़ाई बेपटरी

लखनऊ। राजधानी सहित प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की ड्यूटी एसआईआर (विशेष गहन


पुनरीक्षण) और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बीते तीन महीनों से कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षण व्यवस्था बेपटरी हो गई है।


इसे लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षकों के उत्पीड़न पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है। हजरतगंज स्थित डिप्लोमा

इंजीनियर्स संघ भवन में रविवार को संघ की प्रादेशिक, मंडलीय और जनपदीय इकाइयों के


अध्यक्षों व मंत्रियों की संयुक्त बैठक हुई। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने कहा


कि टीईटी की अनिवार्यता के चलते प्रदेश के लगभग दो लाख शिक्षक निराश हैं। सरकार को प्रभावित शिक्षकों को आवश्यक छूट देनी चाहिए। वेतन विसंगतियों पर कई बार ज्ञापन दिए गए लेकिन मामला सिफर है।


शिक्षकों को प्रताड़ित करने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा। आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में हजारों शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन हो रहा है। साथ ही प्रोन्नत वेतनमान में 20 प्रतिशत की बाध्यता समाप्त करने की मांग भी उठाई गई।


बनी सहमति : बैठक में सरप्लस


समायोजन के खिलाफ शासन स्तर पर जल्द संवाद करने और पीड़ित शिक्षकों को राहत दिलाने पर सहमति बनी। इसके अलावा शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों के परिवारों के लिए निशुल्क चिकित्सा व स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग भी सरकार से किए जाने का निर्णय लिया गया। संघ के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़ा मामला अब संवैधानिक पीठ तक पहुंच चुका है। बैठक में संयुक्त मंत्री आलोक मिश्र, कोषाध्यक्ष ठाकुरदास यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष अनुज त्यागी, संगठन मंत्री बृजेश दीक्षित, पदाधिकारी योगेंद्र द्विवेदी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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