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प्रयागराज में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा विवाद: पेपरलीक और चयन प्रक्रिया पर सवाल

 प्रयागराज से आई रिपोर्ट के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या 51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित लिखित परीक्षा भले ही साढ़े आठ महीने बाद निरस्त हुई, लेकिन परीक्षा की शुचिता पर शुरू से ही सवाल उठने लगे थे।

एसटीएफ ने 18 अप्रैल को यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग के संविदा कर्मचारी महबूब अली को आयोग परिसर से गिरफ्तार किया। जांच में यह खुलासा हुआ कि महबूब अली ने परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये की वसूली की थी। इसके अलावा गोंडा के लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के सहायक प्रोफेसर बैजनाथ पाल और अनुदेशक विनय कुमार पाल को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

सरकार ने इस गड़बड़ी की आशंका के चलते 12 जून को चार सदस्यीय कमेटी गठित कर कॉपी जाँच, कटऑफ और चयन प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया। समिति में एडीएम सिटी प्रयागराज सत्यम मिश्रा, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अपर पुलिस अधीक्षक गीतांजलि सिंह, एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह और उच्च शिक्षा निदेशालय प्रयागराज के सहायक निदेशक अजीत कुमार सिंह शामिल थे।

पहली परीक्षा में ही फेल हुआ आयोग
2023 में गठित यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग की यह पहली परीक्षा थी। 16 और 17 अप्रैल 2025 को 33 विषयों में आयोजित परीक्षा में 82 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। प्रदेश के 331 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया चार सितंबर 2025 को घोषित की गई थी। इसके बाद 25 सितंबर से 8 अक्टूबर और 28 अक्टूबर से 4 नवंबर तक साक्षात्कार कार्यक्रम आयोजित किए गए। हालांकि आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय को सितंबर में ही इस्तीफा देना पड़ा और प्रक्रिया ठप हो गई।

रैंडमाइजेशन और प्रश्नपत्र पर उठे गंभीर सवाल
अभ्यर्थियों ने दावा किया कि रैंडमाइजेशन नहीं होने के कारण आवेदन के क्रम के आधार पर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए। परिणामस्वरूप कई मामलों में रोल नंबर के आधार पर चयन असमान हुआ। इसके अलावा हिंदी विषय के प्रश्नपत्र में 70 में से 18 प्रश्न उसी कुंजी से हूबहू पूछे गए, जो ऑनलाइन 2024 से बिक्री के लिए उपलब्ध थी। फरवरी से अप्रैल 2025 के बीच इस कुंजी की सर्वाधिक बिक्री हुई थी, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे।

यह मामला यूपी में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा सुरक्षा, पेपरलीक और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े हाई CPC RPM कीवर्ड्स के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। शिक्षा विभाग और सरकार के लिए यह चेतावनी भी है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता भविष्य में अभ्यर्थियों के अधिकार और आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।

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