धरने के दौरान शिक्षकों ने कहा कि यह पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है कि 15 से 20 वर्ष तक सेवा देने के बाद उन पर टीईटी जैसी परीक्षा थोपी जा रही है। इसका अस्तित्व ही वर्ष 2011 के बाद आया। शिक्षकों का कहना है कि 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षक उस समय निर्धारित सभी अर्हताओं और शर्तों को पूरा करने के बाद ही चयनित हुए थे। अब उनकी योग्यता पर सवाल उठाना अनुचित है। शिक्षकों ने कहा कि एक सितंबर 2025 से उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत सभी शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू की जा रही है, जो 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के साथ सरासर अन्याय है।
उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार संसद में कानून बनाकर 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूर्ण रूप से मुक्त करे। शिक्षक समाज इस फैसले से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष दयाशंकर गंगवार ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान सर्वोपरि है और इससे कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष लाल करन ने कहा कि जो शिक्षक समाज को अधिकारों के प्रति जागरूक करता है, उसी की योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शिक्षक पदाधिकारी अनीता तिवारी ने कहा कि शिक्षकों पर कोई भी अनुचित आदेश लागू किया गया तो सभी शिक्षक एकजुट होकर संघर्ष करेंगे।यूटा के जिला मंत्री मो. अकरम ने सरकार से इस कानून को वापस लेने की अपील की।
धरने में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के भद्रपाल गंगवार, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री उमेश गंगवार, विमल कुमार, नंद किशोर गंगवार, मियां मनाज़िर, अंकित भारती, चंद्रशेखर गंगवार, निरंजना शर्मा, देवेंद्र कन्हैया, सतेंद्र गंगवार, निधि निगम, रश्मि तिवारी समेत बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं। संवाद

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