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शिक्षकों के तबादले और नीति पर रोक, पुराने आश्वासनों का बार-बार उल्लंघन क्यों: कोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादले और उन्हें सरप्लस घोषित करने की राज्य सरकार की नीति पर नाराजगी जताते हुए वर्ष 2026 की तबादला नीति के उस हिस्से और उसके तहत जारी किए गए ट्रांसफर ऑर्डर पर रोक लगा दी है, जो शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन करते हैं। कोर्ट ने सरकार द्वारा बार-बार अपने ही पुराने आश्वासनों को तोड़े जाने पर नाराजगी जताई है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने विपिन कुमार आर्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। X



याची की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार ने सत्र 2026-27 के लिए गत एक जून को एक सर्कुलर जारी किया था। इस नीति में सरप्लस (अतिरिक्त) कर्मचारियों का निर्धारण करने के लिए 20 नवंबर 1976 के एक पुराने शासनादेश का सहारा लिया गया है।


कोर्ट ने एक जून 2026 के शासनादेश और उसके तहत जारी 30 जून 2026 के ट्रांसफर ऑर्डर को स्थगित कर दिया। आदेश दिया है कि वह 28 जुलाई से पहले व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें और बताएं कि कोर्ट में दिए गए पुराने आश्वासनों का बार-बार उल्लंघन क्यों किया जा रहा है।

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