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शिक्षा सुधारों की गति पर लगा ब्रेक

शिक्षा सुधारों की गति पर लगा ब्रेक
नई दिल्ली (ब्यूरो)। शिक्षा सुधारों की गति पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। नई शिक्षा नीति को अंतिम रूप देने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय लोगों से राय ले रहा है। हालांकि स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में बड़े सुधारों के प्रस्ताव ठंडे बस्ते में हैं। अगले हफ्ते से शुरू होने वाले संसद के बजट सत्र में सरकार आईआईएम और नेशनल एकेडेमिक डिपोसिटरी विधेयक लाने जा रही है।

विद्यार्थियों को आठवीं तक हर हाल में पास किए जाने संबंधी नियम को हटाने की सिफारिश हो या फिर केंद्रीय विश्वविद्यालयों में समान प्रवेश परीक्षा और समान पाठ्यक्रम के प्रस्ताव दोनों पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। मार्च में केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक होनी है। इसमें शिक्षा सुधार को लेकर कई मुददें के हल होने की उम्मीद है।
सरकार आगामी बजट में केजी से पीजी तक एक मॉडल पर काम करने का ऐलान कर सकती है। इसके तहत छात्रों को एक ही संस्थान में केजी से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट, पीएचडी तक करने की सुविधा होगी। उसे स्कूली शिक्षा के बाद कहीं और भटकना नहीं पड़ेगा। शिक्षा से जुड़े जानकार बताते हैं कि सरकार का यह प्रस्ताव अच्छा है लेकिन पुराने प्रस्तावों को लेकर भ्रम की स्थिति बरकरार है।
शिक्षा के अधिकार में बदलाव को लेकर गीता भुक्कल कमेटी ने सिफारिश की थी। शिक्षा के अधिकार के तहत आठवीं तक बच्चों को फेल करने पर प्रतिबंध लगाया गया था।
समिति ने इसे हटाने की सिफारिश की थी। इसे लेकर मंत्रालय ने कोई फैसला नहीं लिया है। साथ ही दसवीं बोर्ड को फिर से लागू करने को लेकर भी विचार हो रहा है। कैब की बैठक में भी इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
नई नीति में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में समान प्रवेश परीक्षा जैसे मुद्दे विचाराधीन
नई शिक्षा नीति को अंतिम रूप देने को मानव संसाधन मंत्रालय ले रहा मशविरा
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