आज हालात आत्मघाती हो गये हैं जो पूरे टीईटी 2011 को गर्त में लेजाकर ख़त्म कर देगा : गणेश दीक्षित

गत पाँच वर्षों के नेतृत्वकाल में इतना बुरा समय टीईटी मोर्चे का कभी नहीँ देखने को मिला । पहले ही मोर्चे को चयनित -अचय्नीत में बाँटने की कोशिश में लगे हैं तो वहीँ सबने अपनी-अपनी मण्डली बनाकर एकदूसरे पर कीचड़ उछालकर अपनी सोच की निम्नता का प्रदर्शन करने में लगे हैं ।


आप सभी के इन कृत्यों पर मुझे शर्म आती है । आप लोगों में थोड़ी भी मानवता बची हो तो टीईटी मोर्चा नामक परिवार को एक रहने दो वरना अंजाम इतना भयंकर होगा की कोई भी सोच नहीँ पायेगा ।
आज हालात आत्मघाती हो गये हैं जो पूरे टीईटी 2011 को गर्त में लेजाकर ख़त्म कर देगा ।
अपनी ही जड़ को थोड़े से लालच के लिये न काटो ।
आप युवा हो ,बदलाव की यलगार हो !
हक के लिये लड़ो ,आपस में नहीँ ।
जो सरकार कानूनी हक न दे ,
उसकी ईंट से ईंट बजा दो ।
अनैतिक और अनाचारी सरकार को एकता की शक्ति से उखाड़ फेंको ।
टीईटी 2011 उत्तीर्ण सभी लोग सारे भेदभावों व मतांतरों को भुलाकर लखनऊ धरने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर अपने हक और न्याय के लिये ताबूत में आखिरी कील ठोंकने के महायज्ञ में आपकी अंतिम आहुति देने के कर्तव्य का पालन करें ।
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