बड़ा सवाल: 12460 पर सरकार द्वारा लगाए गए स्टे के बाद हम सभी बीटीसी प्रशिक्षितों का अगला कदम क्या होना चाहिए ?

नमस्कार दोस्तों, आज फिर आपके जनमत के साथ आगे बढ़ने का शुभारम्भ करना चाहता हूँ ! निवेदन है कि ग्रुप के सभी तेतालीस हज़ार सदस्य इस पोल में हिस्सा लेकर अपना वोट दें ! जो भी मित्र इस लम्बे संघर्ष के बाद आई भर्ती में चयनित रहे उनको शुभकामनाएं !

और जो मेरी ही भांति सरकार के जुए की भांति बनायीं गयी नीतियों के कारण अचयनित रह गए, उनको मेरी ओर से माफ़ी !! शायद मेरे प्रयासों में कहीं कमी थी !
हमें आशा थी कि ये भर्ती जल्दी ही पूर्ण होगी जिससे हम जैसे अचयनित बंधू एक मंच पर आकर एक और नवीन भर्ती की मांग २०१४ बैच पूर्ण होने से पहले कर लें क्योकि उनके बाद नवीन भर्ती के २०१३ बैच के लिए अधिक मायने नहीं होंगे !!
परन्तु खेद का विषय रहा कि भर्ती पर नवीन सरकार द्वारा विराम लगा दिया गया और आगे भी सूचना प्रेषित नहीं कि गयी है !!
अतः अब हमारे सामने दो रास्ते हैं,
एक तो सभी चयनित और अचयनित मिलकर इस भर्ती को पूर्ण कराएं जो अभी स्पष्ट नहीं कि कब तक संभव होगा और इसके बाद नयी भर्ती के लिए संघर्ष करें !!
परन्तु इस विकल्प की जटिलता ये है कि अचयनितों को कुल तीन बार संघर्ष करना होगा (१२४६० लाने का संघर्ष, स्टे हटवाने का संघर्ष, नयी भर्ती समय से लाने का संघर्ष और फिर पूर्ण कराने का संघर्ष) जो कि शयद २०१४ बैच के पास होने से पहले कर पाना मुश्किल प्रतीत होता है !!
दूसरा विकल्प ये कि चयनित और अचयनित मिल कर इस भर्ती के तरीके नयी सरकार को तय करने दें और पदों को बढ़वा कर इस भर्ती का क्रेडिट वर्तमान सरकार को लेने दें जिसकी वो इक्षुक भी प्रतीत होती है, इस से अचयनितों को भी चयनितों की भाँती चयन पाने का अवसर प्राप्त होगा !!
इस विकल्प से लाभ ये होगा कि अचयनित और चयनित दोबारा से संख्याबल के साथ एकजुट दिखेगा और सरकार को भी दो पक्ष बीटीसी में नहीं दिखेंगे (वर्तमान में ये थोडा आसान इसी लिए लगता है क्योंकि दो दिन पूर्व ही सरकार ने विभिन्न विभागों से रिक्त पदों की सूचना तत्काल मांगी है और इस बार ये सूचना सत्य देना अधिकारियों की मजबूरी होगी) !!
मेरे अनुसार अब सही समय है चयनितों के धैर्य और सहयोग का।

इस ग्रुप का एक एक प्रारंभिक सदस्य मैंने, अनुराग और अन्य कई अच्छे साथियों ने जोड़ा है तो बिलकुल आज मैं आप के जनमत के हिसाब से आगे की रणनीति के बारे में विचार रखना चाहता हूँ क्युकी सदैव उद्देश्य जोड़ना रहा है तोडना नहीं !! अतः नीचे दिए गए दो विकल्पों में से एक चुन कर आगे की रणनीति तय करने का अवसर दें !! आशा करता हूँ कि आप में से किसी की भावनाएं आहत नहीं होंगी !!
अंत में पोल में विकल्प चुनें जो आपको लगता है तार्किक, मार्मिक, और सर्वहित के लिहाज़ से सही है !!
आपसे हमेशा की भांति अच्छी आशा लिए,
आपका अपना,
सागर कुलश्रेष्ठ,
फिरोजाबाद
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