सर्वोच्च न्यायालय में यह बताना जरूरी कि मूल प्रकरण 72825 शिक्षक भर्ती का , सर्वप्रथम मूल मुद्दे अर्थात 72825 भर्ती के बेस ऑफ़ सिलेक्शन पर निर्णय किया जाये

माननीय सर्वोच्च न्यायालय में यह बताना जरूरी कि मूल प्रकरण 72825 शिक्षक भर्ती का है । जो मार्च 2012 से राजनीतिक दुर्भावनावश शुरू हुआ । नयी सरकार ने आते ही पुरानी सरकार द्वारा कराई गई एक प्रतियोगी परीक्षा से मेरिट में आ चुके और चयनित होने जा रहे अभ्यर्थियों को हटाने के लिए अकादेमिक मेरिट लाकर दूसरे अभ्यर्थियों को नियुक्त करने का प्रयास किया ।
जिससे पूर्व में चयनित हो रहे अभ्यर्थियों का अधिकार प्रभावित हुआ और वे न्यायालय की शरण में गए , जहाँ माननीय उच्च न्यायालय ने न्याय करते हुए 20 नवम्बर 2013 को उनके और प्रतियोगी परीक्षा अर्थात टेट मेरिट से चयन को संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत नियुक्ति में समस्त प्रतियोगियों को समान अवसर ( समानता के अधिकार की प्राप्ति की अवधारणा ) को मानते हुए , प्रथम विज्ञापन को सही माना और अकादेमिक मेरिट से आये दूसरे विज्ञापन को अनुच्छेद 14 के विपरीत माना ।
इस प्रकार 72825 भर्ती का मार्ग प्रशस्त हुआ । लेकिन तत्कालीन सरकार दुर्भावनावश इसके खिलाफ माननीय सर्वोच्च न्यायालय चली गयी । परन्तु सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशों ने भी प्रतियोगी परीक्षा से चयनित अभ्यर्थियों को सही मानते हुए , उच्च न्यायालय की डबल बेंच के निर्णय को ही लागू करते हुए मेरिट में आये हुए अभ्यर्थियों को अंतरिम रूप से नियुक्त कर दिया ।
बाद में वो समस्त मुद्दे जुड़ते गए जिनका 72825 भर्ती के विज्ञापन के समय अस्तित्व ही नहीं था । अधिकांश भर्तियों के विज्ञापन 2 वर्ष बाद आये । और शिक्षामित्रों का मुद्दा भी 2 वर्ष बाद उठा ।
अतः इस तरह लगातार इस मुद्दे के निर्णय में हो रही देरी से प्रतियोगी परीक्षा में मेरिट में आये अभ्यर्थी भी लगातार मानसिक एवं आर्थिक रूप से प्रताड़ित हैं । अतः सर्वप्रथम मूल मुद्दे अर्थात 72825 भर्ती के बेस ऑफ़ सिलेक्शन पर निर्णय किया जाये , उसके बाद ही अन्य मुद्दों पर ध्यान दिया जाये , जिससे लगातार इस slp में बढ़ती याचिकाओं के ढेर में से निर्णय आना शुरू हो और माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय , सर्वोच्च न्यायालय की जल्द न्याय मिलने की परिकल्पना यथार्थ में परिवर्तित हो सके ।
साथ ही यह भी माननीय न्यायालय में बताना जरूरी कि अकादेमिक मेरिट से चयन कभी सही नहीं हो सकता । क्योंकि अलग अलग बोर्ड , अलग अलग यूनिवर्सिटी , अलग अलग वर्षों के पास अभ्यर्थियों की एक मेरिट नहीं बनायीं जा सकती । साथ ही सरकारों के अलग अलग तरीके से अकादेमिक मेरिट बनाने से हर बार अलग अभ्यर्थियों का चयन होता है , तो योग्यता का पैमाना अभ्यर्थी की खुद की योग्यता है या उसकी किस्मत कि वो सरकार की बनायी व्यवस्था की मेरिट में आ सके ।
उदाहरण ---1--- मुलायम शासन की मेरिट ===
हाई स्कूल का प्रतिशत + इंटर का प्रतिशत + ग्रेजुएशन का प्रतिशत + बीएड का प्रतिशत
2--- मायावती की मेरिट ===
हाई स्कूल का प्रतिशत + इंटर का प्रतिशत + ग्रेजुएशन का प्रतिशत + बीएड के थ्योरी में प्रतिशत + बीएड के प्रैक्टिकल में प्रतिशत
3--- मायावती की दूसरी मेरिट ===
हाई स्कूल का प्रतिशत + इंटर का प्रतिशत + ग्रेजुएशन का प्रतिशत + (बीएड के थ्योरी में प्रतिशत + बीएड के प्रैक्टिकल में प्रतिशत ) / 2
4---- अखिलेश की मेरिट ( संशोधन 15 )
हाई स्कूल का 10 प्रतिशत + इंटर का 20 प्रतिशत + ग्रेजुएशन का 40 प्रतिशत + बीएड का 30 प्रतिशत
5----अखिलेश की मेरिट ( संशोधन 16 )
हाई स्कूल का 10 प्रतिशत + इंटर का 20 प्रतिशत + ग्रेजुएशन का 40 प्रतिशत + ( बीएड की थ्योरी में प्रथम श्रेणी 12 अंक , द्वितीय श्रेणी 6 अंक , तृतीय श्रेणी 3 अंक )+ ( बीएड के प्रैक्टिकल में प्रथम श्रेणी 12 अंक , द्वितीय श्रेणी 6 अंक , तृतीय श्रेणी 3 अंक )
इस प्रकार अलग अलग सरकारों ने अपने अनुसार मेरिट बनाकर अपने मनचाहे लोगों को सेलेक्ट किया । क्योंकि हर मेरिट से अलग अलग लोगों का होगा । जबकि प्रतियोगी परीक्षा , जो कि टेट को 9 नवम्बर 2011 को ही घोषित कर दिया गया था । से निश्चित ही योग्य अभ्यर्थी का चयन होता ।
अतः अकादेमिक के श्राप से मुक्त करते हुए योग्य व्यक्ति के चयन की याचना की जाये ।
सत्यमेव जयते ।
जय हो ।
------------- अनुराग सिंह ( अध्यक्ष ---यूपी टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक महासंघ )
( उपरोक्त लेख मेरे स्वतन्त्र विचार है )

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