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चेक बाउंस होने पर शिक्षिका को एक साल कैद : प्राइमरी विद्यालय की प्रधानाध्यापिका लोन लेना पड़ा मंहगा

बांदा, जागरण संवाददाता : विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट राम किशोर त्रिपाठी की आदालत ने चेक बाउंस होने पर शिक्षिका को एक साल की कैद व 2 लाख 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। हांलाकि बाद में महिला का जमानत दे दी गई।
घटना क्रम में भारतीय स्टेट बैक के शाखा प्रबंधक बीके अग्रवाल ने अदालत में धारा 138 एनआई एक्ट के तहत मुकदमा दायर करके बताया है कि सुमनलता पत्नी मुकुंदलाल निवासी मुहल्ला सेढु तलैया अलीगंज जो मौजूद समय में प्राइमरी विद्यालय में प्रधानाध्यापिका के पद पर तैनात हैं। उन्होंने मकान बनवाने के लिए उनके बैंक से ऋण लिया था। बैंक ने जब ऋण की अदायगी मांगी तो उन्होंने पहले तो बहाने बाजी कर टरकाया। बैंक ने जब दबाव बनाया तो उन्होंने डिस्ट्रिक कोआपरेटिव बैंक के नाम दिनांक 24 जुलाई 2014 को 2 लाख 50 हजार का चेक दिया। बैंक ने उस चेक को क्लीयरेंस के लिए लगाया तो खाते में पर्याप्त पैसे नहीं थे। चेक बाउंस होकर वापस आ गया। उन्होंने शिक्षिका को बुलाया और 6 अगस्त 2014 को चेक वापस कर दिया। इसके बाद उन्होंने बैक को ऋण का एक भी पैसा नहीं दिया। सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शिक्षिका को चेक बाउंस के लिए दोषी माना। शिक्षिका को एक साल की कैद व ढाई लाख जुर्माने की सजा सुनाई। आदेशों में कहा गया है कि जुर्माने की रकम बैंक को तीन माह के अंदर अदा की जाएगी। अन्यथा की दशा में शिक्षिका को दो माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। बाद में महिला को जमानत दे दी गई।
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