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TET: शिक्षक पात्रता परीक्षा में बदलावों की तैयारी, एनसीटीई ने सभी राज्यों से मांगे सुझाव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी जल्द भेजेंगी सुझाव, 2019 से नया कार्यक्रम जारी होने के आसार

इलाहाबाद : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में अहम बदलाव करने की तैयारी है। टीईटी का जिस तरह से नया खाका खींचा जा रहा है उसे पार करना बीटीसी एवं अन्य अभ्यर्थियों के लिए आसान नहीं होगा। इसमें युवाओं को मौके भले ही ज्यादा मिलेंगे, लेकिन परीक्षा का पैटर्न ऐसा होगा, जिसे आसानी से उत्तीर्ण नहीं किया जा सकेगा।
प्रदेश के अफसरों का पूरा हो गया है, जल्द ही रिपोर्ट भेजी जाएगी।1प्रदेश में टीईटी 2011 से लागू है और अब तक पांच बार इसकी परीक्षा भी हो चुकी है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई इस परीक्षा को और प्रभावी बनाने की दिशा में इन दिनों तेजी से काम कर रहा है। एनसीटीई ने देश के सभी राज्यों को कुछ बिंदु भेजे हैं और उन पर सुझाव मांगा है। इसमें एक बिंदु यह है कि टीईटी परीक्षा साल में दो बार अनिवार्य रूप से हो, परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रतिशत तय किया जाए, अभ्यर्थी हर विषय को उत्तीर्ण जरूर करें आदि। इस बिंदुओं पर शिक्षा अधिकारियों की पिछले दिनों एससीईआरटी में बैठक हुई। उसमें सुझाव के साथ ही विकल्प भी दिए गए। एक अफसर ने कहा कि भले ही प्रदेश की परीक्षा संस्था एक बार ही टीईटी का आयोजन करें और दूसरी बार केंद्र की सीटीईटी में प्रतिभाग करने के लिए युवाओं को प्रेरित किया जाए। इससे दो बार का मानक आसानी से पूरा हो जाएगा। इसी तरह उत्तीर्ण होने का प्रतिशत तय किया जाना बेहतर है। अफसरों ने माना कि टीईटी का पैटर्न जिस तरह से बदलना प्रस्तावित है उससे परीक्षा उत्तीर्ण करना किसी भी दशा में आसान नहीं होगा। इसके लिए अभ्यर्थियों को जमकर मेहनत करनी पड़ेगी। यूपी में परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव यह परीक्षा कराती हैं इसलिए एक सप्ताह में एनसीटीई को सुझाव भी वही भेजेंगी। एनसीटीई देश भर से मिलने वाले सुझावों पर नए सिरे से विचार करेगा और 2019 से नया कार्यक्रम जारी होने के आसार हैं।

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