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माननीय हसनैन सर की कोर्ट मे बेसिक शिक्षा सचिव संजय सिन्हा के जबाब की प्रति का 17 मई को प्रस्तुत करे

बात 1996 की है...मुलायम सिंह की सरकार के समय सरकारी मान्यताप्राप्त प्राथमिक विद्यालय के अध्यापको को शासन ने 2 वर्षीय पत्राचार बीटीसी दूरस्थ शिक्षा का कोर्स करवाया।उसके उपरांत इस कोर्स को पूर्ण कर चुके लोगों ने (4000केलगभग) सरकार से प्राथमिक विद्यालयो मे नियुक्ति की मांग की।
सरकारी इंकार के बाद 2007मे यह मामला हाईकोर्ट इलाहाबाद पहुँचा। कोर्ट ने इनको बीटीसी के समकक्ष मानकर नियुक्ति के आदेश कर दिए ।आदेश का अनुपालन न होने पर अभ्यर्थी पुनः अवमानना याचिका फाइल किए माननीय हसनैन सर की कोर्ट मे लखनऊ खंडपीठ मे।वहाँ पर संजय सिन्हा जी ने काउंटर लगाया और सरकार की ओर से कहा कि
*दूरस्थ बीटीसी का कोर्स करने से कोई भी परिषदीय विद्यालयो मे नियुक्ति का पात्र नही है।*
यह पाठ्यक्रम केवल अप्रशिक्षित शिक्षको को न्यूनतम प्रशिक्षण देकर उनके शिक्षण कार्य को उन्नत बनाने के लिए था।वे 4000+प्रशिक्षित अभी भी कोर्ट मे संघर्ष कर रहे है।
यही सरकार इसी कोर्स को कराकर शिक्षा मित्रो के लिए अलग स्टैण्ड प्रस्तुत कर रही है।

यदि लखनऊ खंडपीठ मे सिन्हा जी की दलील की प्रति माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाय तो समायोजन पहली तारीख मे ही रद्द होना तय है। जो भी बीएड बीटीसी बंधु इस केस मे पैरवी कर रहे हैं उन्हे मेरी सलाह है कि माननीय हसनैन सर की कोर्ट मे बेसिक शिक्षा सचिव संजय सिन्हा के जबाब की प्रति का 17 मई को प्रस्तुत करे।
अवश्य सफलता मिलेगी।
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