इलाहाबाद : हाईकोर्ट ने शिक्षामित्र का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद
होने के बाद उनको 16448 सहायक अध्यापक भर्ती में रिक्त पदों पर नियुक्ति
देने का आदेश दिया है। बलिया के नूर हसन मंसूरी की याचिका पर सुनवाई करते
हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दिया।1
याची के अधिवक्ता का कहना
था कि याची की आरंभिक नियुक्ति शिक्षामित्र के पद पर हुई थी। इसके बाद उसे
सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर लिया गया। इसी बीच बेसिक शिक्षा परिषद के
स्कूलों में 16448 सहायक अध्यापक पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हुआ।
याची टीईटी उत्तीर्ण होने और अन्य अर्हताएं रखने के कारण उक्त चयन
प्रक्रिया में शामिल हुआ और चयनित भी कर लिया गया। मगर उसी दौरान उस चयन
प्रक्रिया को लेकर मामला अदालत में विचाराधीन था। इसलिए याची ने 16448
सहायक अध्यापक भर्ती में नियुक्ति नहीं ली। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017
को शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद कर दिया है। इसके बाद
याची ने 16448 सहायक अध्यापक भर्ती में नियुक्ति पाने के लिए आवेदन किया।
मगर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उसका प्रत्यावेदन यह कहकर निरस्त कर दिया कि
नियुक्ति के एक वर्ष के भीतर ज्वाइन न करने के कारण अब उसे नियुक्ति नहीं
दी जा सकती है। प्रदेश की नई सरकार ने 23 मार्च 2017 को अगले आदेश तक के
लिए सभी चयन प्रक्रिया रोक दी थी।
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