शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा विभिन्न याचिकाओं के अधीन: कैसे और क्यों?
आज नियामक सचिव ने संसोधित विज्ञप्ति जारी करके बताया कि ये भर्ती परीक्षा प्रचलित याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
इलाहाबाद पीठ में इस सम्बंध में *विषय को लेकर एवं नियमावली को लेकर
याचिकाएं प्रचलित हैं। जिन पर निर्णय आना शेष है।* इन याचिकाओं के अंतिम
निर्णय से परीक्षा प्रभावित होना लगभग तय है।
*1) रिट याचिका-6641/2018:-*
इसका जिक्र विज्ञप्ति में स्पष्ट है। ये याचिका लिखित परीक्षा को उर्दू
विषय को वैकल्पिक रूप से शामिल करवाने के लिए है। जो कि बिल्कुल सटीक व
कानूनी रूप से उचित है। सरकार इसमे चालाकी से काउंटर में बता रही कि
*प्राथमिक में उर्दू ही नही पढ़ाई जाती न उर्दू विषय होता है। वर्तमान में
उर्दू के शिक्षक प्राथमिक में पर्याप्त हैं। इसलिए भविष्य में उर्दू
शिक्षकों की भर्ती नही होगी। इसलिए इस लिखित परीक्षा में उर्दू वैकल्पिक
विषय नही रखा गया।* इस काउंटर से कोर्ट पूर्णतया असंतुष्ट रही। कोर्ट ने
काउंटर में असहमति जताते हुए दोबारा से रिफ्रेश काउंटर के लिए सरकार को
निर्देशित किया है।
जबकि कक्षा- 3,4,5 में संस्कृत और उर्दू वैकल्पिक विषय होता है। जिसका
उल्लेख छात्रों की अंकतालिका में स्पष्ट होता है। UPTET की परीक्षा में भी
उर्दू वैकल्पिक होता है। *इस तथ्य का जिक्र याची के अधिवक्ता ने अपने
रिजॉइंडर मे बेहतरीन तरीके से किया है।* विगत कुछ दिन पहले और वर्तमान में
भी प्राथमिक में उर्दू शिक्षकों की भर्ती प्रचलित है। जबकि इस बात की MHRD
मिनिस्टर श्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी कहा कि *वैकल्पिक भाषा के चयन का
अधिकार छात्र को होता है।* अब इसमें कोई शक की गुंजाइश नही की उर्दू वालो
का पक्ष बहुत मजबूत है। यदि उर्दू शामिल होती है तो परीक्षा निश्चित ही
लम्बी जाएगी। *इस केस की अगली सुनवाई- 15 मई को होगी।*
*2)रिट याचिका-3676/2018:-*
ये याचिका लिखित परीक्षा के तरीके और उसकी नियमावली को चेलेंज करते हुए
दायर है। इसी परिप्रेक्ष में अनिल वर्मा,मोहित सिंह आदि की भी याचिकायें
प्रचलित है। जिनमे नियमावली,कट ऑफ हटाने की अपील की गई है। *हकीकत ये है कि
इस भर्ती की नियमावली की खामियों को देखते हुए कोर्ट ने सरकार से 09
अप्रैल की सुनवाई में काउंटर मांगा लिया है। सरकार इस परीक्षा को कैसे भी
करवाना चाहती है। इसलिए अब तक उनकी तरफ से कोई काउंटर नही आया। हालांकि
भर्ती परीक्षा को निर्विरोध करवाना इतना आसान नही है।* भर्ती परीक्षा की
पूरी दिशा और दशा इन दोनों याचिकाओं के अंतिम निर्णय पर निर्भर है।
उधर मा0 सुप्रीम कोर्ट में टेट-2017 की खामियों के विरुद्ध *टीम रिज़वान
अंसारी ने अपना काम बखूबी कर दिया।* टेट में हुई ग़लतियों को खुद सचिव
नियामक ने काउंटर में और कमेटी एक्सपर्ट ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया
है। जिसे अंतिम रूप से सुप्रीम कोर्ट ही निस्तारित करेगी।
*😁तैयारी वाले लोग तैयारी करें,लेकिन किसकी ये मत पूंछें।*
*✍🏼वैरागी*💯
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