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बेसिक के फर्जी शिक्षकों से वेतन की रिकवरी के लिए जिम्मेदार कौन? जबकि सत्यापन से लेकर तैनाती के लिए बीएसए जिम्मेदार

बेसिक के फर्जी शिक्षकों से वेतन की रिकवरी के लिए जिम्मेदार कौन? जबकि सत्यापन से लेकर तैनाती के लिए बीएसए जिम्मेदार
फर्जी शिक्षकों से वेतन की रिकवरी क्यों नहीं हो पा रही है, अभी तक इसका स्पष्ट जवाब खुद विभाग खोज नहीं पा रहा है। एक जुलाई को इसी मामले में बीएसए ने यह कहते हुए खंड शिक्षा अधिकारियों के पाले में गेंद डाल दी थी तो शुक्रवार को वित्त एवं लेखाधिकारी से अपेक्षित सहयोग न मिलने का रोना रोया। 

लिहाजा सवाल लाज़िमी है कि यदि शिक्षकों से वेतन की रिकवरी नहीं होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ? जिलों में शिक्षकों का नियुक्ति प्राधिकारी बीएसए ही होता है। प्रमाण पत्रों के सत्यापन से लेकर तैनाती तक बीएसए कार्यालय से दी जाती है लेकिन वेतन रिकवरी या एफआईआर के लिए गेंद दूसरे पाले में डाली जा रही है। 


सितम्बर 2019 को सिद्धार्थनगर बीएसए के स्टेनो को जब एसटीएफ़ ने गिरफ्तार किया था तो उसने इस खेल को उजागर भी किया था कि फर्जी शिक्षकों की वे एक एनजीओ के पैड पर शिकायत करते हैं और बीएसए कार्यालय से उसका वेतन रोक दिया। फिर उस मामले को दबाने के लिए शिक्षकों से पैसे ऐंठे जाते हैं।वहीं इन फर्जी शिक्षकों को नियुक्ति देने वाले और उनके प्रमाण पत्रों के सत्यापन को दबाने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभाग क्या कार्रवाई करेगा, इस पर भी सबकी नजरें हैं? हालांकि विभाग की चौतरफा करवाई से पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है और रोज कहीं न कहीं से फर्जी शिक्षक पकड़े जाने की खबरें आ रही हैं।

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