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बड़ा खुलासा:- सूबे में फर्जी शिक्षकों को नौकरी दिलाने वाले गिरोह का खुलासा, सॉल्वर गिरोह से लेकर परीक्षा कराने वाली कंपनी तक से साठगांठ

 लखनऊ। एसटीएफ ने प्रदेश में फर्जी डिग्री से शिक्षक की नौकरी दिलाने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए शुक्रवार को मास्टरमाइंड समेत तीन जालसाजों को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। एसटीएफ के मुताबिक तीनों

जालसाज सॉल्वर गिरोह, परीक्षा कराने वाली कंपनी से लेकर परिणाम तैयार करने वाली कंपनी से साठ-गांठ कर टीजीटी, पीजीटी व टीईटी के माध्यम से भर्ती कराने का गिरोह चला रहे थे। इसमें प्रयागराज स्थित परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के कुछ कर्मचारी भी लिप्त हैं।




एसटीएफ के डिप्टी एसपी प्रमेश कुमार शुक्ला के अनुसार इस गिरोह ने सैकड़ों लोगों को फर्जी डिग्री पर शिक्षक की नौकरी दिलाई। गिरोह का मास्टरमाइंड फिरोजाबाद के शिकोहाबाद का राम निवास उर्फ राम भईया है, जो खुद फर्जी डिग्री से शिक्षक बना था। दो और जालसाजों में एक बिहार के गया का संजय सिंह है जो डाटा सॉफ्ट कंप्यूटर सर्विसेज प्रा. लि. कंपनी का प्रोडक्शन मैनेजर है। दूसरा आगरा के सिकंदरा का रविंद्र कुमार उर्फरवि है जो देवरिया के बनकटा में फर्जी शिक्षक है। आरोपियों के पास से कई फर्जी डिग्री, अहम दस्तावेज और नकदी बरामद हुई है। गिरोह फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति कराने, टीजीटी,पीजीटी व टीईटी परीक्षा में पास कराने का ठेका लेता था।इसके बदले में लाखों रुपये की वसूली करता था।


छह साल से चल रहा था खेल

एसटीएफ के अनुसार यह गिरोह छह साल से सक्रिय है। 2016 में हुए 15 हजार प्राथमिक शिक्षक भर्ती में सरगना रामनिवास ने 15 अभ्यर्थियों की नियुक्ति कराई और अभ्यर्थी 6 लाख रुपये वसूले। सभी की तैनाती देवरिया में कराई थी, हालांकि कुछ माह बाद फर्जी नियुक्ति बताकर सभी को निकाल दिया गया था। सभी ने रामनिवास पर रुपये वापस करने का दबाव बनाया। इसके बाद राम निवास ने 2017 के 68,500 और 2018 के 69,000/ प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में खेल करना शुरू किया। इन दोनों भर्तियों में चयन प्रक्रिया से संबंधित सभी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध थी, जिसे कोई भी देख सकता था। कई अभ्यर्थी ऐसे थे, जिनका दोनों भर्तियों में चयन हो गया। इनमें से एक में ज्वाइन करने पर दूसरी भर्ती केपद रिक्त रह गए। इन्हीं रिक्त पदों की पूरी जानकारी हासिल कर गिरोह ने फर्जीवाड़ा करना शुरू कर दिया।

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