उत्तर प्रदेश में लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। योगी सरकार ने संकेत दिए हैं कि शिक्षामित्र और अनुदेशक के मानदेय (सैलरी/आदर शुल्क) को लेकर जल्द ही निर्णय लिया जा सकता है।
📌 क्यों अहम है यह मुद्दा?
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्र और अनुदेशक वर्षों से सीमित मानदेय में कार्य कर रहे हैं। बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान मानदेय से परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है। इसी कारण यह वर्ग लंबे समय से—
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मानदेय बढ़ोतरी
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स्थायित्व
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सामाजिक सुरक्षा
जैसी मांगें उठाता आ रहा है।
🧑🏫 सरकार का क्या कहना है?
सरकार की ओर से बताया गया है कि—
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शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है
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वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं का आकलन किया जा रहा है
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निर्णय ऐसा होगा जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो और कर्मचारियों को राहत मिले
मुख्यमंत्री स्तर पर इस विषय को गंभीरता से लिया गया है और संबंधित विभागों से रिपोर्ट भी मांगी गई है।
💰 कितने लोग होंगे लाभान्वित?
प्रदेश में लगभग 1.6 लाख से अधिक शिक्षामित्र और अनुदेशक कार्यरत हैं। यदि मानदेय में बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा लाभ इन सभी को मिलेगा और प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
🏥 अन्य सुविधाओं पर भी चर्चा
मानदेय के साथ-साथ शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को—
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स्वास्थ्य सुविधाएं
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सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने
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भविष्य में बेहतर सेवा शर्तें देने
जैसे बिंदुओं पर भी मंथन चल रहा है।
📢 शिक्षामित्रों की उम्मीदें बढ़ीं
सरकार के सकारात्मक संकेतों के बाद शिक्षामित्रों और अनुदेशकों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही कोई ठोस और आधिकारिक घोषणा की जाएगी।