राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षिकाओं की पदोन्नति की प्रक्रिया बीते ढाई वर्षों से ठप पड़ी है। शिक्षा निदेशालय द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद गोपनीय आख्या (ACR) उपलब्ध न होने के कारण सैकड़ों शिक्षिकाएं पदोन्नति से वंचित रह गईं। हालात इतने गंभीर हैं कि दर्जनों शिक्षिकाएं बिना पदोन्नति पाए ही सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।
📌 गोपनीय आख्या न मिलने से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया
अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) अजय कुमार द्विवेदी ने इस संबंध में छठवीं बार पत्र जारी करते हुए सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिया है कि 25 दिसंबर तक लंबित गोपनीय आख्या अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि—
जिन शिक्षिकाओं की गोपनीय आख्या तय समय सीमा तक प्राप्त नहीं होती, उनके मामलों में दोषी कर्मचारी/अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव भी भेजा जाए, ताकि शासन को अवगत कराया जा सके।
📅 कई बार भेजे गए पत्र, फिर भी लापरवाही जारी
शिक्षा निदेशालय द्वारा गोपनीय आख्या के लिए
11 व 20 जुलाई 2023, 16 मई, 10 जून 2024, 30 सितंबर और 12 दिसंबर 2025 को पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
यहां तक कि 8 अक्तूबर 2025 को जारी पत्र में निर्देश दिया गया था कि—
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20 अक्तूबर तक गोपनीय आख्या न भेजने वाले
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मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक
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27 अक्तूबर को माध्यमिक शिक्षा निदेशक के समक्ष उपस्थित हों
इसके बावजूद किसी भी जेडी ने निर्देशों का पालन नहीं किया।
📊 1883 शिक्षिकाओं की सूची, कई हो चुकीं सेवानिवृत्त
पदोन्नति के लिए भेजी गई 1883 शिक्षिकाओं की सूची में से कई शिक्षिकाएं अब सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। गोपनीय आख्या न मिलने से उन्हें न तो पदोन्नति मिली और न ही उसका कोई वित्तीय लाभ।
❌ बिना पदोन्नति सेवानिवृत्त हुईं शिक्षिकाएं
ललितपुर, पीलीभीत, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बागपत, गाजियाबाद, प्रतापगढ़, फतेहपुर, प्रयागराज, सहारनपुर, बहराइच, वाराणसी, गाजीपुर, बाराबंकी, मैनपुरी, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, गोरखपुर, रायबरेली, लखनऊ, सीतापुर, हरदोई और उन्नाव सहित कई जिलों की दर्जनों शिक्षिकाएं बिना पदोन्नति सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।
👉 इससे न केवल उनका सम्मानजनक करियर ग्रोथ प्रभावित हुआ, बल्कि पेंशन और वेतन संबंधी लाभ भी नहीं मिल सके।
⚠️ सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली
विशेषज्ञों का मानना है कि—
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समय पर गोपनीय आख्या तैयार न होना
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अधिकारियों की जवाबदेही तय न होना
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और वर्षों तक लंबित पदोन्नति प्रक्रिया
ये सभी बातें शिक्षा विभाग की प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती हैं।
🔍 निष्कर्ष
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षिकाओं की पदोन्नति से जुड़ा यह मामला अब केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि न्याय और अधिकार का प्रश्न बन चुका है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में और भी शिक्षिकाएं बिना पदोन्नति सेवानिवृत्त होती रहेंगी।