प्रयागराज | प्रतियोगी परीक्षा समाचार
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, लखनऊ (UPSSSC) द्वारा आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2025 के माध्यम से विभिन्न विभागों के पदों के लिए मुख्य परीक्षा के विज्ञापन जारी किए जाने हैं। इसी बीच अभ्यर्थियों ने आयोग से सभी विभागों एवं पदों के लिए 50 परसेंटाइल की कॉमन कटऑफ निर्धारित करने की मांग तेज कर दी है।
📌 अभ्यर्थियों की मुख्य मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि जब PET एक साझा और समान अर्हता परीक्षा है, तो इसके परिणाम के आधार पर अलग-अलग पदों और विज्ञापनों के लिए भिन्न कटऑफ तय करना तर्कसंगत नहीं है। इससे न केवल भ्रम की स्थिति बनती है, बल्कि असमानता और मानसिक दबाव भी बढ़ता है।
🧠 अलग-अलग कटऑफ से क्या समस्याएं?
अभ्यर्थियों के अनुसार—
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विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग कटऑफ होने से परीक्षा प्रणाली जटिल हो जाती है
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अभ्यर्थियों को यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि वे किन पदों के लिए योग्य हैं
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तैयारी और आवेदन प्रक्रिया में अनावश्यक तनाव बढ़ता है
👥 छात्र युवा संघर्ष समिति का पक्ष
छात्र युवा संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय यादव ने कहा कि—
“अलग-अलग कटऑफ लागू होने से PET में शीर्ष अंक प्राप्त करने वाले सीमित संख्या के अभ्यर्थी लगभग सभी विज्ञापित पदों में चयनित हो जाते हैं। इससे ओवरलैपिंग की स्थिति बनती है और कम अंक पाने वाले योग्य अभ्यर्थी अवसर से वंचित रह जाते हैं।”
⚖️ कॉमन कटऑफ से क्या होगा लाभ?
अभ्यर्थियों का मानना है कि—
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50 परसेंटाइल की कॉमन कटऑफ से समान अवसर मिलेगा
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चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत होगी
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अधिक संख्या में अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा
📢 आयोग से अपेक्षा
अब अभ्यर्थियों की निगाहें अधीनस्थ सेवा चयन आयोग पर टिकी हैं कि वह PET 2025 के परिणामों के आधार पर कटऑफ नीति में बदलाव करता है या नहीं।