📰 टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों को राहत की उम्मीद
देश और प्रदेश के बेसिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है।
शिक्षक संगठनों को शिक्षा मंत्रालय की हालिया पहल से राहत की उम्मीद बंधी है।
साथ ही, संसद के आगामी बजट सत्र में केंद्र सरकार द्वारा संशोधन विधेयक लाए जाने के लिए दबाव भी लगातार बढ़ाया जा रहा है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ आंदोलन
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार—
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1 सितंबर 2025 से
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देशभर के शिक्षकों के लिए
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टीईटी को अनिवार्य किया जाना है
इस आदेश के बाद से ही विभिन्न राज्यों के शिक्षक संगठन आंदोलनरत हैं और इस निर्णय को शिक्षकों के हितों के खिलाफ बता रहे हैं।
🧑🏫 टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) का गठन
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में—
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देश के एक दर्जन राज्यों के शिक्षक संगठनों ने
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मिलकर टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) का गठन किया है
TFI के पदाधिकारियों ने इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात भी की थी।
🏛️ शिक्षा मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन
TFI के प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान—
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शिक्षा मंत्री ने
सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया -
शिक्षक संगठनों के दबाव के बाद
शिक्षा मंत्रालय ने
सभी राज्यों से शिक्षकों से जुड़ा विस्तृत डेटा भी मांगा है
इसे शिक्षक संगठनों द्वारा एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
📢 बजट सत्र में मिल सकती है राहत
TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा—
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मंत्रालय की पहल से
उम्मीद जगी है कि बजट सत्र में राहत मिलेगी -
केंद्र सरकार
देशभर के शिक्षकों के हित में
संशोधन विधेयक ला सकती है -
शिक्षा मंत्री ने भी
इस दिशा में आश्वासन दिया है
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि—
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यह मामला फिलहाल
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई सूची में शामिल नहीं है
🚩 निर्णय नहीं हुआ तो फिर होगा बड़ा आंदोलन
डॉ. शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा—
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यदि शिक्षकों के पक्ष में
कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया -
तो फरवरी–मार्च में
TFI की कार्यकारिणी बैठक बुलाकर
बड़े आंदोलन का फैसला किया जाएगा
इस बीच—
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संगठन के पदाधिकारी
लगातार शिक्षा मंत्री के संपर्क में रहकर
केंद्र सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं
🟢 निष्कर्ष
टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षक समुदाय में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। शिक्षा मंत्रालय की पहल और बजट सत्र की संभावनाओं ने शिक्षकों में नई उम्मीद जगाई है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम और संसद के निर्णय पर टिकी हुई हैं।