बेसिक शिक्षकों में बढ़ती नाराज़गी: TET अनिवार्यता पर केंद्र सरकार की चुप्पी
लखनऊ से आई ताजा खबर के अनुसार बेसिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य
किए जाने के फैसले को लेकर शिक्षकों में गहरी निराशा और असंतोष देखने को मिल रहा है। अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय न आने से शिक्षक संगठनों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।🔹 शिक्षक संगठनों की स्पष्ट मांग
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि:
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TET को अनिवार्य करने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए
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इसके लिए कानून संशोधन विधेयक शीघ्र लाया जाए
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पहले से कार्यरत शिक्षकों को इस बाध्यता से राहत दी जाए
शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई पात्रता शर्त थोपना अन्यायपूर्ण है।
🔹 TET अनिवार्यता का आधार
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत:
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1 सितंबर से देशभर में शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य कर दिया गया
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यह आदेश मौजूदा और भविष्य की नियुक्तियों दोनों को प्रभावित करता है
इसी आदेश के चलते बड़ी संख्या में बेसिक शिक्षक असमंजस और मानसिक दबाव में हैं।
🔹 शिक्षकों की मुख्य आपत्तियां
शिक्षक संगठनों का कहना है कि:
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नियुक्ति के समय TET अनिवार्य नहीं था
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वर्षों की सेवा और अनुभव को नजरअंदाज किया जा रहा है
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इससे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर खतरा पैदा हो गया है
उनका तर्क है कि अनुभवहीन लेकिन TET पास अभ्यर्थी को वरीयता देना शिक्षा की गुणवत्ता के लिए भी सही नहीं है।
🔹 सरकार के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?
✅ लाखों बेसिक शिक्षक सीधे प्रभावित
✅ शिक्षा व्यवस्था में अस्थिरता की आशंका
✅ भविष्य में बड़े आंदोलन की संभावना
यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर का शिक्षक आंदोलन बन सकता है।
🔹 आगे क्या?
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शिक्षक संगठन केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं
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ज्ञापन, धरना और आंदोलन की रणनीति बन सकती है
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अगला कदम सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा
🔹 निष्कर्ष
बेसिक शिक्षकों के लिए TET अनिवार्यता का मुद्दा अब सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि शिक्षकों के सम्मान, अनुभव और सेवा सुरक्षा से जुड़ गया है। केंद्र सरकार द्वारा कानून संशोधन पर लिया गया निर्णय ही इस विवाद का स्थायी समाधान निकाल सकता है।