प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य भर में तैनात सहायक अध्यापकों की सभी नियुक्तियों की जांच करने का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने जांच प्रक्रिया को छह माह के भीतर पूरा करने का निर्देश देते हुए कहा है कि जिन अध्यापकों की नियुक्तियां फर्जी या अवैध पाई जाएंगी, उनकी नियुक्ति रद्द कर अब तक दिया गया वेतन वसूला जाए।
🔹 कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि:
✔️ प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा जांच पूरी करें
✔️ केवल अवैध नियुक्तियां रद्द न हों
✔️ जिन अध्यापकों को वेतन दिया गया है, उसकी वसूली सुनिश्चित की जाए
✔️ जांच में मिली मिलीभगत करने वाली सरकार/विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए
इस आदेश का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करना बताया गया है।
🔹 मामला किस प्रकार सामने आया?
यह आदेश एक याचिका पर आया जिसमें देवरिया की एक शिक्षिका ने अपनी नियुक्ति रद्द किए जाने के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने शिक्षिका के शैक्षणिक और निवास प्रमाण-पत्र जाली पाए जाने के आधार पर नियुक्ति रद्द कर दी थी। याची ने चुनौती दी कि यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया दिए बिना तथा एकतरफा निर्णय थी।
🔹 कोर्ट की टिप्पणी
न्यायालय ने कहा कि:
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राज्य सरकार द्वारा कई सर्कुलर और दिशा-निर्देश जारी होने के बावजूद
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शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया है
कोर्ट ने नियमों के उल्लंघन को शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया और कहा कि इससे छात्रों के हितों को भारी नुकसान पहुँचता है।
🔹 अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार:
🔹 छह माह के भीतर सभी सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों की गहन जांच की जाएगी
🔹 विभागीय स्तर पर मिली शिकायतों का संपूर्ण सत्यापन होगा
🔹 जिन नियुक्तियों में अनियमितता पाई जाएगी, उन शिक्षकों की सेवा समाप्त की जाएगी
🔹 वेतन सहित अन्य लाभों की वसूली भी की जाएगी
🔹 मिलावट, दस्तावेज फर्जी होने तथा अन्य अनियमितताओं में शामिल अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी
🔹 शिक्षकों और विभाग के लिए संदेश
इस आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि:
✔️ शिक्षा विभाग में नियुक्तियों की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमबद्ध होनी चाहिए
✔️ फर्जी दस्तावेज के आधार पर किसी को लाभ नहीं मिलेगा
✔️ नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी शिक्षक या अधिकारी को सख्त दंड मिलेगा
इस कदम को शिक्षा क्षेत्र में विश्वास बहाल करने वाला कदम माना जा रहा है।
🔹 निष्कर्ष
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आंदोलन माना जा रहा है। अब यह देखने वाली बात है कि शिक्षा विभाग कितनी जल्दी और प्रभावी रूप से कोर्ट के निर्देशों का पालन करता है।