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UP प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन पर हाईकोर्ट की रोक 17 फरवरी तक बढ़ी, अगली सुनवाई निर्णायक

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों से जुड़े समायोजन-3 मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर अहम आदेश दिया है। न्यायालय ने इस प्रक्रिया पर पहले से लगी अंतरिम रोक को 17 फरवरी तक बढ़ा दिया है

इसके चलते बेसिक शिक्षा विभाग फिलहाल किसी भी प्रकार की समायोजन या स्थानांतरण कार्रवाई नहीं कर सकेगा।


🔹 क्या है समायोजन-3 मामला?

समायोजन-3 के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों को छात्र संख्या, शिक्षक-छात्र अनुपात और रिक्त पदों के आधार पर एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में समायोजित किया जा रहा था। इस प्रक्रिया को लेकर कई शिक्षकों ने आपत्ति जताते हुए इसे न्यायालय में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि:

  • शिक्षकों की सहमति के बिना समायोजन किया जा रहा है

  • वरिष्ठता और सेवा शर्तों की अनदेखी हो रही है

  • कुछ विद्यालयों में व्यवस्था असंतुलित हो रही है


🔹 हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश

हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक:
✔️ समायोजन-3 की प्रक्रिया पूरी तरह स्थगित रहेगी
✔️ कोई नया आदेश या सूची जारी नहीं की जाएगी
✔️ शिक्षकों की वर्तमान तैनाती यथावत बनी रहेगी

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि अगली सुनवाई में इस मामले पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।


🔹 शिक्षकों के लिए क्या राहत?

इस आदेश के बाद प्राथमिक शिक्षकों को:

  • जबरन स्थानांतरण से अस्थायी राहत

  • मानसिक तनाव से राहत

  • न्यायिक प्रक्रिया में भरोसा

मिला है। शिक्षक संगठनों ने भी इस आदेश को शिक्षकों के हित में बताया है।


🔹 आगे क्या होगा?

राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं की ओर से दलीलें पूरी हो चुकी हैं। अब सभी की निगाहें 17 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं। इसी दिन तय होगा कि समायोजन-3 प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या उसमें बदलाव किया जाएगा।


🔹 निष्कर्ष

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश स्पष्ट करता है कि शिक्षकों से जुड़े मामलों में नियमों और अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक प्राथमिक शिक्षकों को राहत बनी रहेगी।

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