उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती (UP Primary Teacher Recruitment) को लेकर वर्ष 2025–26 में कई महत्वपूर्ण न्यायालयी आदेश सामने आए हैं। इन आदेशों का सीधा प्रभाव नई भर्तियों, पहले से नियुक्त शिक्षकों, TET की अनिवार्यता, और भर्ती सूची की वैधता पर पड़ा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने शिक्षक भर्ती में पारदर्शिता और योग्यता को सर्वोपरि मानते हुए सख्त रुख अपनाया है।यह लेख UP Primary Teacher Latest Court Orders की पूरी स्थिति को सरल हिंदी में स्पष्ट करता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: नियुक्त शिक्षकों की पुनः जांच
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में नियुक्त प्राथमिक और सहायक शिक्षकों की व्यापक जांच (Verification) के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि:
-
फर्जी दस्तावेज़ों या गलत योग्यता के आधार पर की गई नियुक्ति अवैध मानी जाएगी
-
ऐसे मामलों में नियुक्ति रद्द की जा सकती है
-
वेतन वसूली और विभागीय कार्रवाई भी संभव है
👉 यह आदेश भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती से जुड़े मामलों में यह स्पष्ट कर दिया है कि:
-
UPTET / CTET पास होना अनिवार्य है
-
यह शर्त केवल नई भर्ती तक सीमित नहीं है
-
पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए भी TET आवश्यक माना गया है
कोर्ट के अनुसार, बिना TET शिक्षक सेवा में बने रहना शिक्षा कानूनों के उद्देश्य के विपरीत है।
सरकार बनाम TET आदेश: स्थिति क्या है?
राज्य सरकार ने TET को सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर लागू किए जाने को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज की है।
हालांकि, जब तक कोई नया आदेश या संशोधन नहीं आता, कोर्ट का फैसला ही प्रभावी माना जाएगा।
👉 इसका असर:
-
प्रमोशन
-
सेवा निरंतरता
-
भविष्य की नियुक्तियों
तीनों पर पड़ रहा है।
69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामला: अभी भी न्यायालय में
उत्तर प्रदेश की चर्चित 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती अभी भी पूरी तरह निपट नहीं पाई है।
स्थिति यह है:
-
हाईकोर्ट ने पहले भर्ती सूची पर सवाल उठाए
-
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई
-
अंतिम निर्णय अभी लंबित है
👉 जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, यह भर्ती न्यायिक निगरानी में बनी रहेगी।
कुछ भर्तियों को मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ लंबित भर्तियों को आगे बढ़ाने की अनुमति भी दी है, जिससे:
-
रुकी हुई चयन प्रक्रियाएं आगे बढ़ सकें
-
रिक्त पदों पर नियुक्ति संभव हो
-
अभ्यर्थियों को राहत मिले
हालांकि, यह अनुमति शर्तों और नियमों के अधीन है।
कोर्ट आदेशों का सीधा प्रभाव किन पर पड़ा?
अभ्यर्थियों पर
-
TET के बिना चयन संभव नहीं
-
दस्तावेज़ सत्यापन और सख्त हो गया
कार्यरत शिक्षकों पर
-
TET न होने पर सेवा और प्रमोशन पर संकट
-
पुरानी नियुक्तियों की पुनः जांच
सरकार पर
-
भर्ती नियमों में संशोधन का दबाव
-
कोर्ट निर्देशों के अनुसार नीति बनाना अनिवार्य
वर्तमान स्थिति में उम्मीदवार क्या करें?
-
TET (UPTET / CTET) अनिवार्य रूप से पास रखें
-
सभी शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र सही और सत्य हों
-
केवल आधिकारिक भर्ती विज्ञापनों पर ही भरोसा करें
-
कोर्ट आदेशों और नियमों की जानकारी नियमित रूप से रखें
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि कानूनी जांच, TET अनिवार्यता और दस्तावेज़ सत्यापन इसका अहम हिस्सा बन चुके हैं। न्यायालयों का रुख साफ है —
👉 योग्यता से कोई समझौता नहीं होगा।
आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया और अधिक कठोर, पारदर्शी और नियमबद्ध होने की संभावना है।