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बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप : इस मंडल में 42 शिक्षकों के नाम और DOB एक, 2 जगह तैनाती, फर्जीवाड़ा

मानव संपदा पोर्टल पर 42 शिक्षकों की दो जगहों पर आईडी सक्रिय होने पर यूपी के आजमगढ़ मंडल में बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

दोनों जगहों पर इन शिक्षकों के नाम, पिता के नाम और जन्मतिथि एक है। इनमें 30 शिक्षक आजमगढ़, आठ बलिया और चार मऊ जिले में तैनात हैं। निदेशालय से इस बारे में जवाब मांगे जाने पर सहायक शिक्षा निदेशक ने सभी शिक्षकों का वेतन रोक दिया है। उधर, शिक्षकों से जुड़ा एक फर्जीवाड़ा सीतापुर में भी पकड़ा गया है। वहां बीएसए ने फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी करने के आरोपी 13 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया है।


निदेशालय की तरफ से की जा रही मॉनीटरिंग के दौरान मानव संपदा पोर्टल पर एक ही नाम और जन्मतिथि वाले कई शिक्षकों की दो-दो आईडी सक्रिय होने का मामला प्रकाश में आया था। इसके बाद प्रदेश के सभी बीएसए और एडी बेसिक से मामले की जांच कर अवगत कराने के लिए कहा गया था। 20 जनवरी को बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक और आजमगढ़, मऊ और बलिया जिले के बीएसए को पत्र भेजकर 28 जनवरी तक कार्रवाई से अवगत कराने के लिए कहा था। मामले का निस्तारण नहीं होने पर उन्होंने नौ फरवरी को दूसरी बार पत्र भेजा। इस आदेश के क्रम में गुरुवार शाम आजमगढ़ मंडल के तीनों जिलों के बीएसए को एडी बेसिक ने पत्र जारी किया। उन्होंने छह मार्च को सभी शिक्षकों को नियुक्ति के समय दिए गए मूल अभिलेखों के साथ अपने कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।



क्या बोले एडी बेसिक

एडीए बेसिक मनोज कुमार मिश्रा ने कहा कि आजमगढ़ मंडल में 42 शिक्षकों की मानव संपदा पोर्टल पर दो-दो आईडी है। उनके नाम, जन्मतिथि और पिता के नाम एक हैं। सभी शिक्षकों को छह मार्च को नियुक्ति के समय दिए गए मूल अभिलेखों के साथ कार्यालय में बुलाया गया है।


सीतापुर में 13 शिक्षक इस वजह से हुए बर्खास्त

सीतापुर में शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन में इन सभी शिक्षकों का टीईटी प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। विभाग इन शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज कराने की कवायद में जुटा है। यह मामला 12,460 शिक्षक भर्ती से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2024 में 12,460 शिक्षक भर्ती करीब 1100 शिक्षकों को जिले में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती मिली थी। विभाग द्वारा इन शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। पहले चरण में करीब 500 शिक्षकों के अभिलेखों के सत्यापन में इन शिक्षकों के अभिलेख फर्जी पाए गए थे।

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