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संसद को कानून बनाने का अधिकार, केंद्र के शपथपत्र से बाध्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, ग्रेट्रः सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि संसद के पास कानून बनाने का पूर्ण अधिकार है और वह केंद्र सरकार द्वारा अदालत में दिए गए किसी भी शपथपत्र से बाध्य नहीं है। यह टिप्पणी चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने की।



यह पीठ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 की वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। यह धारा देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से जुड़ी है। एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि धारा 152 पूर्व की भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (देशद्रोह) को फिर से प्रस्तुत करती है। मई, 2022 में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने उचित सरकारी फोरम द्वारा देशद्रोह कानून को परखे जाने तक इस पर रोक लगा दी थी और केंद्र व राज्यों को देशद्रोह के लिए कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं करने का निर्देश दिया था। वकील ने शुक्रवार को बताया कि 2022 में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र दिया था कि वह देशद्रोह कानून की समीक्षा करेगी। सरकार बीएनएस में इस प्रविधान को फिर से प्रस्तुत नहीं कर सकती। पीठ ने कहा, 'केंद्र ने भले शपथपत्र दिया हो सकता है, लेकिन संसद इससे बाध्य नहीं है।

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