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शिक्षक बनाम शिक्षामित्र मामले में आया नया मोड़ : एसएसए आरटीई एक्ट लागू करवाने वाली एजेंसी है :सुप्रीम कोर्ट

बड़ी खबर: भाग -2 (शिक्षक बनाम शिक्षामित्र मामले में आया नया मोड़। एक अन्य बेंच में हुई 4 अक्टूबर को सुनवाई।) 5 अक्टूबर 2016 को जस्टिस दीपक मिश्रा और यू यू ललित की खंडपीठ में हुयी एक सुनवाई के आदेश में कोर्ट ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान आरटीई एक्ट लागू करवाने वाला एक अभिकरण है।
*ज्ञातव्य हो कि शिक्षामित्र एसएसए द्वारा नियुक्त शिक्षक हैं।* ये मामला तेलंगाना राज्य का है।
आइये अब बात 4 अक्टूबर को बीएड बेरोज़गारों की अवमानना याचिका की।
जैसा कि कल की पोस्ट में हमने आदेश की विस्तृत जानकारी देने वादा किया था इसी कड़ी में हम आप को बताते चलें कि कोर्ट ने *उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा के भौतिक एवं मानवीय संसाधनों की विस्तृत जानकारी लेने के लिए तीन सदस्यीय वरिष्ठ अधिवक्ताओं की एक कमेटी का गठन किया है जिसके चैयरमैन वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अशोक गुप्ता होंगे। ये कमेटी दो सप्ताह इलाहबाद में रहकर भौतिक संसाधनों के साथ साथ शिक्षकों की आवश्यकता पर अपनी रिपोर्ट कोर्ट द्वारा निर्धारित तेलंगाना गाइड लाइन पर तैयार कर जस्टिस दीपक मिश्रा की खंडपीठ को सौंपेगी।*
*ध्यान रहे ये याचिका शिक्षामित्रों को हटा कर बीएड बीटीसी बेरोज़गारों को नियुक्त करने के उद्देश्य से डाली गई है।*
यहाँ ये भी जानना ज़रूरी है कि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को इलाहबाद के अपने मन पसंद स्कूलों की सूची उक्त जाँच कमेटी को सौंपने की छूट दी है।
*इस पुरे मामले की ख़ास बात ये कि इस केस में राज्य सरकार की ओर से मात्र एमआर शमशाद जो एओआर वकील ही खड़े होते रहे हैं साल भर से। मिशन सुप्रीम कोर्ट समूह के रबी बहार, केसी सोनकर और साथियों के अलावा शिक्षामित्रों के अन्य पैर्विकारों को तो इस केस की अब तक कोई जानकारी नहीं है।
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