दिनांक 9 जनवरी 2017 की सुनवाई का सार: सय्यद सलमान आरफ़ी की कलम से

दिनांक 9 जनवरी 2017 की सुनवाई का सार। शिक्षा मित्र साथियों जैसा की आपको।ज्ञात था कि 9 जनवरी 2017 को शिक्षा मित्रों के प्रशिक्षण और टेट करके अन्य भर्तियों में जाने पर रोक लगाने हेतु जितेंद्र सिंह सेंगर
की याचिका पर सुनवाई होनी थी इस सुनवाई हेतु 7 दिसम्बर 2015 को भी और 9 जनवरी 2017 को भी सभी टीम द्वारा बेहतर तरीके से तैयारी की गई थी सभी टीम ने अपने लायर को बहुत ही अच्छे ढंग से ब्रीफ कराकर कोर्ट उतरने की रणनीति बनाई ।हमारी और से टीम के एडवोकेट श्री संजय त्यागी जी भी  बहुत तैयारी के साथ कोर्ट में पहुचे।
इसके अतिरिक्त सभी टीम की और से सीनियर लायर कोर्ट में  पहुचे।परन्तु आज का दिन केवल जितेंद्र शाही जी के नाम रहा ।बेशक आज जितनी भी तारीफ की जाये कम है।।ठीक 10:40 पर अपना केस सुनवाई पर आया  ।टीम के लायर संजय त्यागी जी और शिक्षा मित्र की और से आये सभी लायर ने केस को मेरिट पर सुनकर इस को ख़ारिज करने की अपील की पर तभी बेसिक शिक्षा परिषद की और से  सीनियर अधिवक्ता राजू रामचंद्रन जी ने सभी जजिस को बताया कि 12 सितम्बर 2015 के बाद किसी भी शिक्षा मित्र का समायोजन नही किया गया है जो भी शिक्षा मित्र  अपॉइंट हुए है सब सीधी भर्ती से आये है।इसके तुरंत बाद शाही जी की और से देश व दुनिया के जाने माने लायर हरीश साल्वे जी ने केस सुनवाई को अपने हाथ में लिए और विपक्ष की धज्जियां  उड़ा दी।हरीश साल्वे जी का प्रभाव इतना था कि विपक्ष की और से किसी लायर की बोलने की जुर्रत नही हुई।साल्वे जी ने  इस रिट की खरिज किये जाने की अपील की तथा कोर्ट को ये बताया कि किस प्रकार बार बार मार खा खा कर ये लोग बार बार कोर्ट को गुमराह कर रहे है।इस मामले में संयुक्त सकिर्य टीम की लायर पावनी मेडम का भी बेहद सटीक सहयोग हरीश साल्वे जी को मिलता रहा कुल मिलाकर आज पहली बार शिक्षा मित्र विजय की और अग्रसर लगा।परन्तु अंत में नन्दन जी ने कुछ लियोन के पत्र दिखाकर ये बताया कि कुछ शिक्षा मित्र अपॉइंट हुए है।जिसके कारण मामला ख़ारिज न होकर 22 को टेग हुआ।पर अब इस रिट में कुछ बचा नह है।क्योंकि जो भी भर्ती हुई है इसमें शिक्षा मित्र के लिए न कोई कोटा था और न कोई अलग से विज्ञापन ।
जो भी साथी अलग भर्ती में गए है वो बाकायदा कोर्ट के आदेश से गये है।इसलिए अब 22 फरवरी की सुनवाई अब बहुत ही महत्वपूर्ण हो गई।22 को अब ये केस चूँकि पूरे दिन सुना जायेगा इसलिये अब कोई न कोई निर्णय तो आयेगा ही।एक बात आज ज़रूर कहूँगा।
मित्रों वो ये की गांव की एक गन्दी कहावत है
""100 बार सु सु मत करो बल्कि एक बार सुसरी कहदो।"
कहने का मतलब ये की 50 हज़ार के वकील लेकर अगर हमारा सपना ये केस जीतने का है तो हम शिक्षा मित्रों से बड़ा कोई मूर्ख नही ।इसलिये जो जज़्बा इसबार शाही जी ने दिखाया ।ऐसा सभी संघ करे।।वरना डेट डेट का खेल सारी ज़िन्दगी चलता रहेगा।समायोजित का तो कुछ नही बिगड़ेगा।पर असमायोजित बेमौत मारा जाता रहेगा।इसलिये 22 के लिए तैयार रहे।और कोशिश हो साल्वे जी 22 को भी रहे।
अब 6 मारने की ज़िम्मेदारी प्रथमिक शिक्षा मित्र संघ की है उनको चाहिए की अगली बार साल्वे जी की टक्कर के ही लायर मैदान में लेकर उतरे तो सब का भला होगा।वैसे भी अब अमित सिब्बल और मनोज प्रसाद के नाम सुन सुन कर कान पक गए है।इसलिए
इसबार कमसे कम 2 फ्रेश और दमदार चेहरों के साथ मैदान में उतरे ।मेरी बात को अन्यथा न लेना ।में खुद भी दोनों संघ की मजबूती में विश्वास रखता हूँ। टेट की slp में शामिल जिन साथियों ने सहयोग किया।उनका धन्यवाद। व जिन साथियों ने सहयोग नही किया उनके लिए भी साधुवाद। पर उनसे इतना अवश्य कहूंगा। अगली सुनवाई के लिए अभी से कमर कस ले ।और सहयोग करे।।नोकरी आपकी है।मुक़दमा आपका है हम लोग तो केवल इसको लीड कर रहे है इसमें सहयोग न करना घटियापन है।।बूँद बूँद से सागर बनता है।आपका थोड़ा सहयोग बड़ा काम बना सकता है।इसलिए इसबार न चुके।।शाही जी को एक बार फिर दिल से धन्यवाद कहना चाहूंगा और ये उम्मीद भी करता हूँ की अगली सुनवाई पर फिर से साल्वे जी कोर्ट में रहे।इन्ही शब्दो के साथ अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
आपका साथी
सय्यद सलमान आरफ़ी
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