शिक्षा मित्र बाहर होंगे , समायोजन निरस्त होकर सहायक अध्यापक पद नहीं मिलेगा , और रही ट्रेनिंग तो आदेश में कुछ ऐसा होगा.............

शिक्षा मित्र बाहर होंगे , समायोजन निरस्त होकर सहायक अध्यापक पद नहीं मिलेगा , और रही ट्रेनिंग तो आदेश में कुछ ऐसा होगा , जिससे उसका लाभ उन्हें खुली भर्ती से भी नहीं मिलेगा , क्योंकि अगर ध्यान से चंद्र
चूड़ जी का ऑर्डर पढ़ा जाए तो , ट्रेनिंग का कोई महत्व ही नहीं , जो जिस पद हेतु एलिजिबल ही नहीं , उसकी ट्रेनिंग ही क्यों , और जब समायोजन रद्द होगा तो ट्रेनिंग का कोई अर्थ नहीं , फिर जिनकी नियुक्ति में इतने पेंच हों , जिनका समायोजन गलत और अवैध है , उनकी ट्रेनिंग कैसे वैध ठहराई जा सकती है , इसपर स्वयं दोनों जज मंथन करेंगें , और मुझे पूरी आशा है कि , मैन्शन हुई अशोक तिवारी 19837 रिट को विशेष रूप से पढ़कर ही आदेश को लिखेंगे । और मेरे सभी मित्र , इस बात को भी समझें कि जितनी भी कोर्ट प्रोसीडिंग्स मे याचिकाएं मैन्शन हुई हैं , पूरे ऑर्डर का सार भी इन्हीं याचिकाएं के इर्द गिर्द होगा , जिसमें अपनी तरफ से 4347 , 36262 , 19837 , 14386 , 13922 , 4204 , 900 , 167 , 244 , 1121 , 20444 , इत्यादि । ऑर्डर मामला बड़ा और संगीन होने के वहज से समय तो लेगा ही , आप तो बस यही सोचें कि आदेश जब भी आए , आपकी नियुक्ति लेकर आए , बाकी जज भी मजबूर होंगे , क्योंकि उन्हें कानून से हटकर कुछ भी करना असंभव होगा , इसीलिए शिक्षा मित्रों का बचना नामुमकिन है , आपने सुनबाई मे देखा ही होगा , कैसे इनके बड़े बड़े वकील दया की अपील कर रहे थे , इसी वजह से इनको सुना भी ज्यादा गया , ताकि कल को ये न्यायपालिका पर ये आरोप न लगाएं कि हमें कंही भी ढंग से सुना नहीं गया , क्योंकि ये सबको अपने बाप की प्रॉपर्टी समझते हैं , जैसा उत्पात हाई कोर्ट के आदेश पर मचाया था , क्या भरोषा , ये सुप्रीम कोर्ट की भी अवमानना करें , मैं तो कहता हूं , ऐसी सज़ा दो इनके रहनुमा लोगों को कि कोर्ट की अवमानना करने से पहले 1000 बार सोचें , प्यारे शिक्षा मित्रों , तुम्हे तो अब कोई चाहकर भी नहीं बचा सकता , इतनी सी बात को दिमाग में नोट कर लो , ट्रेनिंग ट्रेनिंग चिल्लाओ , उससे भी कुछ नहीं मिलने वाला , समायोजन तो गया , उसके बाद खुली भर्ती की राह भी गई , और वैसे भी खुली भर्ती के काबिल भी कहाँ हैं शिक्षा मित्र , इनको तो हराम और फ्री का समायोजन चाहिए था , सब कुछ इन इंटर पास लोगों को घर बैठे कराया गया , ट्रेनिंग से लेकर समायोजन तक , बौराना तो स्वाभाविक है , क्योंकि जब कोई चीज़ आपको आपकी योग्यता से बढ़कर मिल जाए , या फिर कोई आप पर यूँ ही मेहरवान हो जाए , तो भाव सांतवें आसमान से भी ऊपर चढ़ना लाज़मी है , पर कोई नहीं कोर्ट हमें क्या देगी क्या नहीं इसकी हम लोग चिंता नहीं करते , पर तुम्हारा समायोजन तुमसे हर हाल में वापस ले लेगी , क्योंकि उमा देवी केस तुम्हारे लिए वो कानून रूपी ब्रह्मास्त्र है , जिसका वार अचूक है । हमारी चिंता छोड़ो , तुम सब अपनी चिंता करो , जब मिली हुई जाती है तो बहुत कष्ट होता।
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