Leaderboard Ad – Below Nav

Ad – Above Posts (Multiplex/Display)

Ad – Between Posts Section

वेतनमान घटने के सदमे ने ली महिला शिक्षामित्र की जान

खेसरहा (सिद्धार्थनगर)। समायोजन रद्द कर प्रतिमाह केवल दस हजार रुपये मानदेय देने के फैसले से महिला शिक्षा मित्र को ऐसा सदमा लगा कि उसकी जान चली गई।
वह पिछले तीन वर्षों से प्राथमिक विद्यालय में समायोजित शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही थीं। घटना खेसरहा थाना क्षेत्र के पिपरा दोयम गांव की है।
गांव निवासी संकठा की पत्नी लीलावती (45) प्राथमिक विद्यालय मसइचा में शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत थीं। वर्ष 2014 में उनका समायोजन शिक्षक के रूप में करते हुए विभाग ने पास के ही रिउना प्राथमिक विद्यालय में तैनात किया था। सुप्रीम कोर्ट के समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद से ही वह परेशान और अस्वस्थ रहने लगी थीं। दो दिन पहले सिर दर्द की शिकायत की थी। परिजनों ने मंगलवार को उनका  चेकअप कराया तो सब कुछ सामान्य था।
बताते हैं कि बुधवार की सुबह अखबारों में शिक्षामित्रों का मानदेय केवल 10 हजार रुपये तय किए जाने की खबर के बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में परिजन उन्हें नजदीक के निजी अस्पताल ले गए। ग्राम प्रधान विपुल कुमार ने बताया कि वहां चेकअप के दौरान उसका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा मिला। हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने बस्ती रेफर कर दिया, पर रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
लीलावती की तीन संतानों में दो बेटियां राधा, अंजनी और पुत्र अंकित हैं। राधा का विवाह हो चुका है। पति संकठा खेती करते हैं। आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष हेमंत शुक्ला व महामंत्री श्याम बिहारी चौधरी ने शिक्षामित्र की मौत के लिए कम मानदेय निर्धारण को बताते हुए कहा कि सरकार से वार्ता के बाद मिले आश्वासन से शिक्षामित्रों को काफी उम्मीद थी, लेकिन महज 10 हजार रुपये मानदेय तय किए जाने से शिक्षा मित्रों को तगड़ा झटका लगा है। यह सदमा ही लीलावती की जान पर भारी पड़ गया, जिनके कंधे पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी।

sponsored links:
ख़बरें अब तक - 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती - Today's Headlines

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

UPTET news