इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राथमिक स्कूलों के अप्रशिक्षित
अध्यापकों को दो वर्षीय डीएलएड डिप्लोमा लेने की सूचना न देने पर केंद्र और
राज्य सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।
कोर्ट ने पूछा है कि मानव
संसाधन विकास मंत्रलय के तीन अगस्त 2017 के सकरुलर को पूरी तरह से लागू
क्यों नहीं किया गया?
यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता ने उप्र बेसिक शिक्षक संघ की याचिका पर
दिया है। याचिका पर अधिवक्ता संजय कुमार मिश्र व भारत सरकार के अधिवक्ता
राजेश त्रिपाठी ने पक्ष रखा। याची का कहना है कि मानव संसाधन विकास मंत्रलय
ने सकरुलर जारी कर कहा कि एक अप्रैल 2019 के बाद सभी अप्रशिक्षित
अध्यापकों की सेवा समाप्त कर दी जाएगी। केंद्र सरकार ने एनआइओएस के माध्यम
से दो वर्षीय डीएलएड डिप्लोमा लेने को कहा। राज्य सरकार को जिम्मेदारी दी
गई कि वह प्रशिक्षण प्राप्त करने की सभी अप्रशिक्षित अध्यापकों को सूचना
दे, जबकि राज्य सरकार से सूचना न मिलने के कारण दो लाख अप्रशिक्षित अध्यापक
आवेदन करने से वंचित रह गए। याची का कहना है कि राज्य सरकार ने सकरुलर के
नियम का पालन नहीं किया। इसलिए उन्हें दो वर्षीय डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त
करने का मौका दिया जाए। याचिका की सुनवाई चार जुलाई को होगी।
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